आज जो लाल किले पर हुआ, अगर इस बात का जोरदार विरोध नहीं होगा तो कल कोई भगवा वाला आकर भगवा झंडा फहरा देगा लाल किले पर, परसों कोई मुस्लिम लीग वाला आकर हरा झंडा लगा देगा, उस दिन शायद आप कहेंगे काश पहली बार जब भीड़ कोई दूसरा झंडा लगा रही थी काश उस दिन उनको रोक दिया होता । बाकी आपके राजनैतिक समीकरण होंगे, मेरा कोई नहीं है, इसीलिए अपने दिल की बात खुल के रख सकता हूं, आपको मनाऊंगा नहीं, आप अपने विचारों के लिए स्वतंत्र है, और आपको पूरी आजादी है आप जो मानते है, समझते है, उस पर अटल रहने की, और वही स्वंतत्रता मेरे पास भी है ।

 

जिस दिन हमने अपने राष्ट्रीय प्रतीकों को अराजकता के हवाले कर दिया, उस दिन से गण की आवाज़ तंत्र में नक्कारखाने की तूती की तरह हो जाएगी, जिस झंडे को देखकर आपको अपनी भारतीयता का अभिमान होता है उसे जब २-४०० गुंडे आकर तार तार कर जायेंगे और आप तब भी कुछ नहीं करेंगे , बिल्कुल आज की तरह ही, क्योंकि आपको पॉलिटिकली करेक्ट रहना है, जरा सोचिए, सरकारें आती जाती रहेंगे और आपकी देशभक्ति का आपकी पसंदीदा सरकार होने ना होने से कोई सरोकार नहीं है।

आज आपने गणतंत्र की सबसे बदसूरत झांकी देखी, तंत्र को सहमाता हुआ गण और गण बेचारा कहला कर बच भी जाएगा और सारी सहानुभूति भी ले जाएगा, ये वही है जो कुछ दिन पहले अमेरिका में हुआ था, Capitol hill पे, किसी जगह अवैध झंडा लगाने का मतलब है, *कब्जा करना, अपना दावा ठोकना,* पूरा इतिहास भरा पड़ा है झंडा फेहेरा कर अपनी जीत का ऐलान करने के प्रसंगों से , ये सांकेतिक प्रतीक है , किसी को कुचल के रख देने के आह्वान का ,लेकिन यहां पे देश का मान कुचल दिया मुट्ठी भर गुंडों ने ।

 

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