भोपाल गैस त्रासदी के 36 साल हो चुके है लेकिन आज भी इस हादसे का जख्म ताजा हैं. भोपाल की वो खौफनाक काली रात को कौन भूल सकता है, जब आंखों और सीने में जलन सहते हुए लोग अपनी जान बचाने सड़कों पर भाग रहे थे. उस रात हर जिस्म जहर हो रहा था,और भोपाल धीरे धीरे मुर्दों का शहर हो रहा था. सिर्फ यह सुनाई दे रहा था, भागो! गैस रिस गई है.

जी हां हम बात कर रहे है 2-3 दिसंबर 1984 को इतिहास की सबसे बड़ी मानव निर्मित भोपाल गैस त्रासदी की. जहां यूनियन कार्बाइड फैक्टरी के प्लांट नंबर सी के टैंक नंबर 610 से निकलती मिथाइल आइसोसाइनेट गैस ने भोपाल के एक बड़े इलाके में लाशों के ढेर लगा दिये थे. जो रात को घरों में सो रहे थे उनमें से हजारों सोते ही रह गए. सुबह हुई लेकिन चारों तरफ लाशें उठाने के आवाज सुनाई दे रही थी.

वहीं दूसरी ओर उन लाशों को ढोने के लिए गाड़ियां छोटी होती नजर आ रही थी. उस रात न लाशा को जात पांत का फर्क था और हिंदू के हाथ थामे मुस्लिम का हाथ था. उस रात भोपाल मुर्दों का शहर हो रहा था,हर जिस्म जहर हो रहा था. लगातार ट्रक भरकर लाशों के आने का सिलसिला हमीदिया अस्पताल में जारी रहा. मरने वालों की संख्या कितनी थी, इसे लेकर आज तक सही आंकड़े सामने नहीं आ सके हैं. उस दौर के लोग आज भी वह मंजर भूले नहीं हैं. इसका दंश आज भी पीढ़ियां भुगत रही हैं. वे कई बार उस रात को याद कर सिहर उठते हैं. कुछ ऐसे भी दृश्य थे जब एक मां की जहरीली गैस के कारण आंखों की रोशनी चली गई. उसने भागने की कोशिश की,तो भट्‌ठी में जा गिरी. पत्नी को झुलसने के बाद बचाने की जद्दोजहद में पति ने भी अपनी सांसे रोक दी. ऐसे कई खौफनाक मंजर आज भी उस इलाके में लोगों से बात करों तो सामने आ जाते है.

हर जिस्म जहर हो गया था एक दिन. मुर्दों का शहर हो गया था भोपाल एक दिन..

फर्क था न लाश को जात पांत का. नस्ल रंग आज सब साथ साथ था..

हिंदू का हाथ थामते मुस्लिम का हाथ था. जां जहाँ था मौत के हाथ था…

हर जर्रा शरर हो गया भोपाल एक दिन. मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन..

आपको बता दे कि उस रात यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट नंबर 'सी' के टैंक नंबर 610 में जो गैस भरी थी. उसमें पानी भर गया था. केमिकल रिएक्शन से बने दबाव को टैंक सह नहीं पाया और वो खुल गया. बस फिर क्या था 2—3 दिसंबर की उस रात को भोपाल ने मौत का मंजर दिखाना शुरू कर दिया था. इस मंजर को देखे और भोगते हुए आज पूरे 36 साल गुजर गए है. त्रासदी से मिले जख्म पीड़ितों के जेहन और जिस्म में आज भी ताजा है. आज भी त्रासदी के कारण दर्जनों इलाकों में कई बच्चे बीमार या शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम पैदा हो रहे हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी इस त्रासदी से मिली बीमारियों को ढोने को मजबूर हैं.

इन्हीं सब के बीच गुरुवार को भोपाल नम आंखों से भोपाल गैस त्रासदी की 36वीं बरसी पर भोपाल के बरकतउल्ला भवन (केन्द्रीय पुस्तकालय) में सर्वधर्म प्रार्थना सभा करेगी. प्रार्थना सभा में सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह शामिल होंगे. कार्यक्रम सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सीमित लोगों की उपस्थिति में होगा. प्रार्थना सभा में विभिन्न धर्म गुरु, धर्मग्रंथों में से पाठ कर दिवंगत गैस पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.