हरिद्वार कुंभ में जिला प्रशासन यू तो RTPCR की नेगेटिव रिपोर्ट के बाद ही श्रद्धालुओं को कुंभ महापर्व में शामिल होने के लिये प्रवेश दे रहा है। लेकिन उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग की 13 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार में 594 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और positive cumulative including pvt ltd के अंतर्गत 18437 केस है. यहां अब तक के कुल एक्टिव केस की बात करें तो हरिद्वार में 2812 कोरोना के एक्टिव केस हैं. इसके साथ ही जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा,आवाहन अखाड़ा के करीब 10 साधु संत कोरोना पॉजिटिव निकले हैं और सोमवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत नरेंद्र गिरी की भी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इनके संपर्क में आए करीब 40 से अधिक संतों की कोरोना टेस्ट की गई है.

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एक तरफ जहां लाखों की संख्या में जहां लोग आस्था के इस महाकुंभ में आ रहे है तो वहीं संतों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद अब कोरोना का संकट जिला प्रशासन के सामने मंडराने लगा हैं. इसे लेकर जब हरिद्वार कुंभ मेला के सहायक मेला अधिकारी हरबीर सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने कुछ सवालों के जवाब इस तरह दिए हैं.

प्रश्न : क्या सभी अखाड़ों में संतों का कोरोना का टेस्ट किया गया है ?

उत्तर : हरिद्वार में जो स्थायी अखाड़े है उनमें रहने वाले सभी संतों का कोरोना का टेस्ट किया गया है. वहीं इन सभी संतों का वैक्सीनेशन भी किया गया हैं.

प्रश्न: क्या अखाड़े में बाहर से आने वाले साधु संतों का भी टेस्ट स्वास्थ विभाग ने किया है ?

उत्तर : नहीं बाहर से आने वाले सभी साधु संतों के लिये केंद्रीय और राज्य सरकार द्वारा जारी एसओपी के तहत (72 घंटे) पूर्व की RTPCR की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाने पर ही प्रवेश दिया गया हैं.

प्रश्न : अखाड़ों में आने वाले साधु संतों की संख्या तो लाखों में होती है तो फिर प्रशासन ने क्या व्यवस्था की हैं ?

उत्तर : जिला प्रशासन के द्वारा शहर में प्रवेश करने वाली प्रमुख सभी सीमा पर चौकी स्थापित की है. यहां संतो या आम जन के द्वारा प्रवेश लेने के पहले एसओपी के तहत (72 घंटे) पूर्व की RTPCR की नेगेटिव रिपोर्ट मास्क और सैनेटाइजर साथ रखना होता है इसके बाद ही उन्हें शहर में प्रवेश दिया जाता हैं.

प्रश्न : कोरोना संक्रमण न फैले इसे लेकर घाट पर और कुंभ मेला क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने क्या क्या व्यवस्था की हैं ?

उत्तर : सहायक मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने बताया कि शहर स्थानीय लोगों के लिये भी मेला क्षेत्र में प्रवेश करने के लिये RTPCR की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना होता है. तभी उन्हें मेला क्षेत्र में प्रवेश दिया जाता है. शाही स्नान से लेकर आम स्नान के दिनों के लिये घाट पर प्रतिदिन सैनेटाइजेशन का कार्य सुबह शाम किया जाता हैं. वहीं मेला क्षेत्र में भी स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन सैनेटाइजेशन का कार्य कर रहा हैं.

प्रश्न : इतना सैनेटाइजेशन और एसओपी का पालन करने के बाद भी संत पॉजिटिव निकल रहे है ऐसा क्यों ?

उत्तर : कुछ संत प्रमुख स्नान और पर्व के दो दिन पहले ही हरिद्वार में आते है. प्रवेश के समय प्रशासन की ओर से प्रोटोकॉल फॅालो किया जाता है. उनसे उनकी RTPCR की नेगेटिव रिपोर्ट पुछी जाती है चेक किया जाता है उसके बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाता है. अभी तक तीन अखाड़े के 8 संत पॉजिटिव आए थे जो इसी तरह पर्व के एक दिन पहले प्रवेश किये और चार से पांच दिन बाद वे पॉजिटिव पाय गए. लेकिन यह भी है की उनकी रिपोर्ट ए सिम्टोमेटिक रही थी यानी वे इतने ज्याद संक्रमित नहीं थे लेकिन फिर भी उन्हें तत्काल अस्पताल में कोरोनटाइन कर उनके अखाड़े का सैनेटाइजेशन का कार्य किया और मेला क्षेत्र में प्रवेश हेतु प्रतिबंधित कर दिया गया.

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सहायक मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने बताया कि इसी तरह अखाड़ा परिषद अध्यक्ष भी शनिवार को शहर में आए थे और उसी रात उन्हें दस्त और उल्टी होने लगी. तत्काल उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती किया लेकिन सुबह ठीक होने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. इसी दिन उनकी कोविड टेस्ट भी किया जिसकी रिपोर्ट रविवार को आई जो पॉजिटिव थी. जिला प्रशासन ने तत्काल निरंजनी अखाड़े में ही महंत नरेंद्र गिरी को आसोलेशन में रख दिया था. लेकिन सोमवार को उनकी त​बीयत ज्यादा खराब होने के कारण उन्हें ऋषिकेश के एम्स में भर्ती किया है. अभी उनकी तबीयत में स्थीरता है,वे स्वास्थ है.

सहायक मेला अधिकारी हरबीर सिंह ने बताया इसके अलावा अब स्वास्थ्य विभाग ​और जिला प्रशासन द्वारा और सख्ती कर दी गई हैं,सभी अखाड़ों में संतों को वैक्सीनेशन दिया जा रहा है. वहीं आश्रम, धर्मशाला में रूके अखाड़े के प्रतिनिधियों का भी वैक्सीनेशन किया जा रहा हैं.