कोरोना वायरस महामारी के दौर में अब लोगों की पैर डगमगाने लगे हैं. कोरोना संक्रमण जिस तरह से लोगों को अपने चपेट में ले रहा है उससे लोग घबराएं हुए हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिनका विश्वास प्रबल है. ऐसे ही एक 86 साल की वृद्ध महिला हैं जो कोरोना से पीड़ित थी और डॉक्टर ने उनके स्वास्थ्य को लेकर जवाब भी दे दिया है कि वह कुछ दिनों की मेहमान हैं. लेकिन वृद्ध महिला ने डॉक्टर को झूठा साबित कर दिया और अब वह अपने घर पर हैं.

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अगर हमारी इच्छाशक्ति, हमारा भगवान में विश्वास प्रबल है, तो दुनिया की कोई भी शक्ति डगमगा नहीं सकती. ये कहना है इंदौर की 86 साल की बुजुर्ग महिला उमा शर्मा का, जिनका कोरोना का इलाज चल रहा है और डॉक्टर कह चुके हैं कि, उमा शर्मा के फेफड़ों में 60 प्रतिशत संक्रमण फैल चुका है और ये एक से दो दिन की मेहमान है.

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हालांकि, वृद्ध महिला उमा ने डॉक्टर से कहा है कि, 'डॉक्टर साहब, अगले साल मेरे जन्मदिन पर जरूर आना.'

15 दिन पहले इंदौर के अस्पताल में भर्ती हुई 86 साल की बुजुर्ग महिला उमा ने अपने जज्बे से डॉक्टरों से झूठा साबित कर दिया. वह कोरोना को मात देकर फिर से सामान्य जिंदगी में लौट आई हैं. आपको बता दे कि डॉक्टरों ने उनकी कोरोना रिपोर्ट और सीटी स्कैन देखकर कह दिया था कि अब इनके पास 1-2 दिन का ही समय बचा है.

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आईसीयू में कोरोना के गंभीर मरीजों के साथ रहते हुए भी वे हमेशा यही कहती रहीं कि मुझे कोरोना नहीं है. मुझे एक बार घर ले चलो. बिस्तर पर लेटे लेटे वह भजन कीर्तन करते हुए बाकी मरीजों का साहस बढ़ाती रहीं. आखिर उनकी इच्छाशक्ति का परिणाम रहा कि वह ठीक हो गईं. जब हनुमान जन्मोत्सव पर उनका जन्मदिन आया, तो बोलीं - डॉक्टर साहब मेरे अगले जन्मदिन पर जरूर आना. जब स्टाफ को पता चला कि उनका जन्मदिन है, तो वहां पर भी सेलिब्रेट किया गया.

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आखिरकार, 14-15 दिन के संघर्ष के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई और वे सकुशल घर लौट आईं.

उमा का कहना है कि अगर जीने की इच्छा और सकारात्मक ऊर्जा आपके अदंर है तो आप इस महामारी से लड़ सकते हैं. आपको दुनिया की कोई भी शक्ति डगमगा नहीं सकती.

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