इतिहास में 11 सितंबर का दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है. दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के सीने पर इस दिन हुए घातक आतंकी हमले ने एक ऐसा जख्म दिया, जिसकी टीस रहती दुनिया तक कायम रहेगी. 2001 को 11 सितंबर के दिन आतंकवादियों ने यात्री विमानों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध वर्ल्ड ट्रेड टॉवर और पेंटागन को निशाना बनाया. इसे अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमले के तौर पर देखा जाता है. 

इस काले दिन को याद करते हुए 9/11 मेमोरियल एंड म्यूजियम ने ट्विटर पर पोस्ट किया, "उन्नीस साल पहले, खुले नीले आसमान के नीचे, 102 मिनट ने हमारे जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया. शुक्रवार 11 सितंबर को हम 2001 के हमलों की 19वीं वर्षगांठ का अवलोकन करने में देश और दुनिया का नेतृत्व करते हैं और आपको हमारी याद में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं."

बता दें कि ट्विन टॉवर बनाने में पांच साल लगे थे. लेकिन नॉर्थ टावर से पहला प्लेन टकराने के बाद दोनों बिल्डिंग्स के ढहने में सिर्फ 102 मिनट का समय लगा था. 

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से आकर टकराए थे दो विमान

11 सितंबर 2001 को अमेरिका में सबकुछ सामान्य जैसा था. आम लोग अपने काम में जुटे थे. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में भी कर्मचारी रोज की तरह काम करने पहुंचे थे. लेकिन उन्हें नहीं पता था आज वहां क्या होने वाला था. सामान्य जैसा लगने वाला दिन पल भर में खौफनाक हो गया, जब सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर एक विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से आकर टकराया. लोगों को लगा ये एक बड़ा हादसा है. लेकिन इसके बाद ही 9 बजकर 3 मिनट पर एक और विमान इस बिल्डिंग से आकर टकराया तो सभी को समझ में आ चुका था कि ये एक बड़ा आतंकी हमला है.

जारी रहा हमले का सिलसिला

आतंकियों ने एक साथ चार विमान को हाइजैक किया था. दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराने के बाद तीसरा विमान वाशिंगटन के रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन से टकराया, जबकि चौथा शेंकविले के खेत गिरा दिया गया. इस घटना में विमान में सवार कोई यात्री जिंदा नहीं बचा.

3000 लोगों की मौत

न्यूयार्क के मैनहैटन में स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से विमान टकराने के बाद पल भर में धाराशायी हो गया. 104 मंजिला और 546 मीटर ऊंचा इमारत एक झटके में ध्वस्त हो गया. पूरे न्यूयार्क में चीख पुकार मच गई. इस हादसे में 3000 लोगों की मौत हुई. इस घटना में 90 ऐसे लोगों की भी जान गई थी जो अमेरिका से बाहर के थे.

दुनिया में इस घटना को सबसे बड़े आतंकी हमले के रूप में जाना जाता है. हमले के बाद पूरी दुनिया के मुख्य शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. इस हमले से आतंकियों ने सभी को दहशत में ला दिया था. इस घटना के पीछे खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन का हाथ माना जाता है. घटना के समय अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश थे. वहीं, साल 2011 में ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार गिराया गया.