.. राजीव शर्मा ..

धर्म कहता है कि 'परमेश्वर/अल्लाह सब जगह है, वह तुम्हें हर समय देख रहा है, तुम्हारे दिल की बातें जानता है।' यह एक उच्च आदर्श है।

हकीकत में कितने लोग इस आदर्श पर कायम रह पाते हैं? इसकी जांच करनी हो तो राह चलते किन्हीं 100 लोगों को सोने-चांदी से भरी दुकान में ले आएं और यह कहते हुए एक घंटे के लिए वहां छोड़ दें कि 'परमेश्वर/अल्लाह यहां मौजूद है, वह तुम्हें देख रहा है।'

जब आप एक घंटे बाद आएंगे तो दुकान खाली मिलेगी। उन 100 में से 2 या 3 लोग ऐसे हो सकते हैं कि जो शायद सोना-चांदी को हाथ न लगाएं। बाकी 98 या 97 इसे सुनहरे मौके के तौर पर देखेंगे और सबकुछ लेकर फुर्र हो जाएंगे।

यह तो हुआ एक उच्च आदर्श। अब आदर्श थोड़ा छोटा कर लीजिए। उन्हीं लोगों को यह कहते हुए दुकान में ले आएं कि आप सब कैमरों की नजर में हैं। अगर किसी ने गलत नीयत से सोना-चांदी को हाथ भी लगाया तो ऊपर बैठे कमांडो इंतजार नहीं करेंगे, सीधे आपकी खोपड़ी में गोली मारेंगे ... तो थोड़ा संभलकर रहें, बाकी आपकी मर्जी!

यह भी पढ़ें: फायदा या नुकसान, आप इस धरती को क्या देकर जा रहे हैं?

आप एक घंटे बाद वहां आएं और चेक करें, हर चीज अपनी जगह सलामत मिलेगी। अगर इस तस्वीर को बड़ी कर लें तो पाएंगे कि हमारा सामाजिक व्यवहार ऐसा ही है। उसमें धर्म का पालन करते हुए उसे अपने आचरण में उतारने वाले लोग थोड़े-से होंगे, बाकी सब लोगों के नाम धार्मिक जैसे होंगे, वे धर्म की बड़ाई कर लेंगे, लेकिन उस पर ठीक-ठीक आचरण नहीं कर पाएंगे।  

यह भी याद रखें ​कि प्रार्थनाएं, तीर्थयात्राएं आदि शुरुआती चीजें हैं। धर्म का विस्तार व्यापक है। धर्म प्रार्थनाओं, तीर्थयात्राओं, बाहरी चिह्न धारण करने से आगे भी है। अगर कोई इन्सान यह सब करने के बावजूद मन से शुद्ध नहीं है, दूसरों को सताता है, मिलावट करता है, रिश्वत लेता है, दूसरों की तबाही की कामना करता है, तो उसके द्वारा रोज की जा रहीं प्रार्थनाएं किसी टाइमपास से ज्यादा कुछ नहीं हैं। वे निष्फल हो जाती हैं।

मैं जानता हूं कि हममें से बहुत लोगों के मन में कभी-कभी धार्मिक राष्ट्र की उमंग हिलोर लेती रहती है। ऐसे लोगों को लगता है कि उनकी हर समस्या का समाधान इसी में निहित है, जबकि ऐसा नहीं है।  

यह भी पढ़ें: सुनो, सुनो, सुनो! सभी समोसा-प्रेमियों के लिए टेंशन वाली ख़बर आ गई है

हमारा वास्तविक आचरण हमसे छिपा नहीं है। अगर लोग चरित्रवान नहीं होंगे तो उनके लिए धार्मिक राष्ट्र लूट का सुनहरा मौका होगा। इसलिए बेहतर है कि आदर्श छोटा किया जाए, अभी लोगों को चरित्रवान बनाया जाए, लोकतंत्र को कायम रखा जाए और आधुनिक विज्ञान व टेक्नोलॉजी के साथ कानून का प्रभावी शासन स्थापित किया जाए ताकि ईमानदार लोग सुख से जिएं और जो बेईमान हैं या जिनके बेईमान होने का खतरा है, वे भी ईमानदारी के रास्ते पर आने को मजबूर हो जाएं।

(अच्छी बातें पढ़ने के लिए इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाइए और मुझे फॉलो कीजिए)

मेरे साथ फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

#India #Pak #Pakistan #Bangladesh #IndoPak #Hinduism #Islam