तालिबान (Taliban) द्वारा अफगानिस्तान (Afghanistan) के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराए जाने के दावे खोखले साबित होते जा रहे हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक, तालिबान ने काबुल में टोलो न्यूज (Tolo news) के एक पत्रकार ज़ियार खान याद (Ziar Khan Yaad) के साथ मारपीट की है. यह पत्रकार टोलो न्यूज के लिए काम कर रहे थे. खबर थी कि उनकी मौत हो गई है, लेकिन बाद में पत्रकार ने खुद सामने आकर बताया कि वह जीवित हैं. 

टोलो के समाचार संवाददाता ज़ियार खान याद ने अपनी मौत की रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "रिपोर्टिंग के दौरान मुझे काबुल के न्यू सिटी में तालिबान ने पीटा था. कुछ लोगों ने मेरी मौत की खबर फैला दी है जो झूठी है."

जियार खान याद ने ट्वीट कर कहा, "रिपोर्टिंग के दौरान काबुल के न्यू सिटी में तालिबान ने मुझे पीटा. कैमरा, तकनीकी उपकरण और मेरा निजी मोबाइल फोन भी हाईजैक कर लिया गया है. मेरी मौत की खबर कुछ लोगों ने फैलाई है जो झूठी है. तालिबान एक बख्तरबंद लैंड क्रूजर से बाहर निकला और मुझे बंदूक की नोक पर मारा." 

टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, काबुल में हाजी याकूब चौराहे पर गरीबी और बेरोजगारी पर रिपोर्टिंग करने को लेकर तालिबान ने जियार याद खान और उनके कैमरामैन को पीटा था. टोलो न्यूज ने खान के हवाले से कहा, "जब हम तस्वीरें ले रहे थे, तालिबान आए और हमें बताए बिना कि वे कौन थे, मेरा मोबाइल फोन ले लिया." 

बता दें कि तालिबान ने काबुल पर कब्जे से पहले अफगान सेना के साथ संघर्ष के दौरान भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी को मार दिया था. 29 जुलाई को अमेरिका स्थित एक पत्रिका की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सिद्दीकी न केवल अफगानिस्तान में एक गोलीबारी में मारा गया था, न ही वह केवल 'कोलैटरल डैमेज' का मामला था, बल्कि तालिबान द्वारा उसकी पहचान की पुष्टि करने के बाद "क्रूरता से हत्या" की गई थी.

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