नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के तहत कांगो में तैनात भारतीय सेना की एक टुकड़ी ने मध्य अफ्रीकी देश के गोमा शहर के पास ज्वालामुखी फटने के बाद नागरिकों के साथ ही वैश्विक निकाय की परिसम्पत्ति की रक्षा की। यह जानकारी अधिकारियों ने रविवार को दी।

शनिवार रात में माउंट नाइरागोंगो ज्वालामुखी लगभग दो दशकों में पहली बार फटा जिसके बाद गोमा में हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर भागे।

अधिकारियों ने कहा कि भारतीय टुकड़ी की पहल से ज्वालामुखी फटने के बाद नागरिकों और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अन्य कर्मियों को तेजी से निकालने में मदद मिली।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने यहां कहा, ‘‘आसन्न खतरे के मद्देनजर भारतीय दल की कार्रवाई से गोमा में नागरिकों और संयुक्त राष्ट्र के अन्य कर्मियों को वहां से निकालने एवं उसकी रक्षा करने में मदद मिली है।’’

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के तहत कांगो में भारतीय सेना की महत्वपूर्ण उपस्थिति है, जिसका मुख्यालय पूर्वी शहर गोमा और सीमावर्ती रवांडा में है। भारतीय दल का ब्रिगेड मुख्यालय गोमा हवाई क्षेत्र के निकट स्थित है।

अधिकारियों ने कहा कि एहतियात के तौर पर, विभिन्न देशों की टुकड़ियों को संयुक्त राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली द्वारा सतर्क रहने के लिए कहा गया था तथा यह माना गया था कि वहां से निकलने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि हालांकि, उड्डयन टुकड़ियों सहित अधिकांश टुकड़ियों को तुरंत वहां से निकाला गया।

अधिकारियों ने कहा कि भारतीय ब्रिगेड मुख्यालय ने शांत तरीके से कदम उठाते हुए शिविर में कर्मियों की संख्या 70 प्रतिशत कम कर दी और कुछ कर्मियों को सुरक्षा की दृष्टि से हिम्बी कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) भेज दिया।

उन्होंने कहा कि शिविर में कम संख्या में जवान बने रहे, यह सुनिश्चित करते हुए कि संयुक्त राष्ट्र और राष्ट्रीय परिसंपत्ति को कोई खतरा नहीं हो और साथ ही खाली उड्डयन बेस और वहां विमानन ईंधन को सुरक्षा प्रदान की जाए।

अधिकारियों में से एक ने बताया, ‘‘एक अवलोकन बिंदु भी स्थापित किया गया है जो ब्रिगेड मुख्यालय को लावा प्रवाह के वास्तविक समय की जानकारी दे रहा है, जो इसे संयुक्त राष्ट्र को सही जानकारी देने में सक्षम बनाता है।’’

उन्होंने कहा कि यह पता चला है कि लावे का प्रवाह अब काफी धीमा हो गया है।

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संयुक्त राष्ट्र संगठन मिशन का व्यापक उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सार्वजनिक संस्थानों, प्रमुख शासन और सुरक्षा सुधारों का समर्थन करना है।