राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और अन्य बीमारियों से ग्रस्त 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीके की पहली खुराक लेने से लोगों के मन में टीके के प्रति किसी भी तरह की हिचक दूर हो जानी चाहिए. मोदी ने सोमवार सुबह भारत बायोटेक द्वारा स्वदेश में निर्मित कोवैक्सीन टीके की पहली खुराक ली. गुलेरिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि प्रधानमंत्री के टीका लगवाने के बारे में एम्स को रविवार देर रात सूचना दी गई और उनके लिये कोई विशेष प्रबंध नहीं किये गए.

गुलेरिया ने कहा, “क्योंकि सोमवार (कामकाजी) का दिन था इसलिये उन्होंने सुबह जल्दी टीका लगवाने का फैसला किया जिससे अस्पताल आने वाले अन्य मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो.” उन्होंने कहा, “पहले ही दिन प्रधानमंत्री के टीका लगवाने से आम लोगों में भरोसा जगेगा और टीके को लेकर किसी भी तरह की शंका और हिचकिचाहट दूर होगी. लोगों को टीका लगवाने के लिये आगे आने चाहिए और भारत को इस बीमारी से मुक्त करना चाहिए.” गुलेरिया ने कहा कि पुडुचेरी की रहने वाली सिस्टर पी निवेदा को प्रधानमंत्री को टीका लगाने के ‘हाईप्रोफाइल’ काम के बारे में सुबह ही जानकारी दी गई. एम्स के निदेशक ने कहा कि मोदी को सुबह करीब साढ़े छह बजे टीका लगाया गया और उसके बाद तय प्रक्रिया के मुताबिक करीब आधे घंटे तक उन्हें निगरानी में रखा गया, जिसके बाद वह चले गए. गुलेरिया ने कहा, “टीका लगवाने के बाद वह ठीक हैं.”

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टीका लगवाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “मैंने एम्स में कोविड-19 टीके की पहली खुराक ली. कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने बहुत कम समय में असाधारण काम किया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन सभी लोगों से कोरोना वायरस का टीका लगवाने की अपील करता हूं, जो इसके पात्र हैं. आइए, हम सब मिलकर भारत को कोविड-19 से मुक्त बनाएं.’’ नर्स निवेदा ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि टीका लगवाने के बाद प्रधानमंत्री ने उनसे कहा, ‘‘लगा भी दिया, पता भी नहीं चला.’ उन्होंने बताया कि वह गत तीन साल से एम्स में कार्यरत हैं और इस समय टीकाकरण केंद्र में सेवाएं दे रही हैं.

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