राष्ट्रीय विमानन कंपनी एअर इंडिया लिमिटेड ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि उसने 40 से अधिक उन पायलटों की सेवायें समाप्त कर दी है, जिन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया था. कंपनी ने कहा कि उन पायलटों के विकल्प के तौर पर अन्य लोगों को नियुक्त कर लिया गया है.

कंपनी ने यह दलील पायलटों की विभिन्न याचिकाओं के जवाब में दी है. पायलटों की याचिकाओं में विमानन कंपनी को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह उनके द्वारा इस्तीफे वापस लिए जाने को स्वीकार कर ले.

पायलटों ने अपनी दलील में कहा कि उन्होंने शुरुआत में वेतन और भत्तों के भुगतान में देरी को लेकर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया था.

एअर इंडिया ने अपने जवाब में कहा है कि वह पहले से ही लगभग 30,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी हुई है और इसके अलावा उस पर विभिन्न बैंकों, सेवा प्रदाताओं आदि की लगभग 11,000 करोड़ रुपये की देनदारी भी है.

उच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में कंपनी ने कहा कि इस तरह पायलटों के वेतन और भत्तों के भुगतान में देरी किसी गलत इरादे से नहीं की गई थी, बल्कि कंपनी की खराब वित्तीय स्थिति के कारण ऐसा हुआ था.

विमानन कंपनी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण उसका वाणिज्यिक कामकाज बहुत कम हो गया था और उसे अपने लगभग समूचे बेड़ा को जमीन पर रखना पड़ गया. इसके अलावा स्थानापन्न पायलटों को पहले ही नियुक्त कर लिया गया है और अगर इस्तीफा देने वाले पायलटों को रख लिया जाता है, तो पायलटों की संख्या फाजिल हो जाएगी.

कंपनी ने कहा कि मौजूदा अपवाद वाली परिस्थितियों में इस्तीफे को वापस लिये जाने को स्वीकार करना ‘‘जनहित के खिलाफ होगा.’’