गाय को लोकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है. एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गौरक्षा को किसी भी धर्म से जोड़ने की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने कहा गाय को अब एक राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए. केंद्र को इस पर विचार करने की जरूरत हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैदिक, पौराणिक, सांस्कृतिक महत्व व सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है. कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को माता मानते हैं. यह हिंदुओं की आस्था का का विषय है. आस्था पर चोट से देश कमजोर होता है. कोर्ट ने कहा गो मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है.

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कोर्ट ने कहा पूरे विश्व में भारत ही एक मात्र देश है जहां सभी संप्रदायों के लोग रहते हैं. पूजा पद्धति भले ही अलग हो, सोच सभी की एक है. एक दूसरे के धर्म का आदर करते हैं. कोर्ट ने कहा गाय को मारने वाले को छोड़ा तो फिर अपराध करेगा.

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बुधवार को जावेद नाम के शख्स की याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी की थी. जावेद पर गोहत्या रोकथाम अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 के तहत आरोप लगे हैं. ऐसे में कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गौरक्षा सिर्फ किसी एक धर्म की जिम्मेदारी नहीं है.गाय इस देश की संस्कृति है और इसकी सुरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है. फिर चाहे आप किसी भी धर्म से ताल्लुक क्यों ना रखते हों.

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जस्टिस शेखर कुमार यादव ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार को अब सदन में एक बिल लाना चाहिए. गाय को भी मूल अधिकार मिलने चाहिए. समय आ गया है कि अब गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाए. वहीं जो भी गाय को परेशान करते हैं, उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

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