.. राजीव शर्मा ..

बहुत लोग अज्ञान के कारण यह कहते/लिखते मिल जाते हैं कि क़ुरआन पुराने ज़माने में लौट जाने की बात कहता है, खासतौर से 1,400 साल पहले। इस गलत धारणा को उस समय भी बल मिलता है जब सोशल मीडिया पर क़ुरआन संबंधी पोस्ट के आसपास बीते ज़माने की पोस्ट भी मिल जाती हैं।  

इनमें या तो मुगल काल की बड़ाइयां मिलेंगी या घनघोर बुराइयां, निष्पक्ष व संतुलित विश्लेषण कम ही मिलेगा, इसलिए जो लोग क़ुरआन से परिचित नहीं, वे इस धारणा के शिकार हो जाते हैं कि शायद यह किताब पुराने ज़माने की ओर लौट जाने की बात कहती है क्योंकि क़ुरआन पढ़ने वाले तो उसी ज़माने का जिक्र करते हैं। वे भविष्य की बात नहीं करते।

क़ुरआन में इस गलत धारणा का साफ शब्दों में जवाब दिया गया है। वास्तव में क़ुरआन का संदेश तीन बिंदुओं पर आधारित है: 1. भूतकाल से शिक्षा प्राप्त करो, 2. वर्तमान में सुधार करो और 3. भविष्य को बेहतर बनाओ, बेहतर की उम्मीद रखो।

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अगर पहले दो बिंदुओं का ठीक-ठीक पालन कर लिया जाए तो तीसरे बिंदु का काम काफी हद तक पूरा हो जाता है। क़ुरआन की सूरह अल-माइदह (5) में कहा गया है:

' ... निसंदेह तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक प्रकाश और एक प्रकट करने वाली किताब आ चुकी है।' (5/15)

'इसके माध्यम से अल्लाह उन लोगों को शांति के मार्ग दिखाता है जो उसकी प्रसन्नता के इच्छुक हैं और वह अपनी अनुकंपा से उनको अंधेरों से निकालकर प्रकाश में ला रहा है और सीधे रास्ते की ओर उनका मार्गदर्शन करता है।' (5/16)

दोनों आयतों में एक खास शब्द आया है- 'प्रकाश'। प्रकाश की प्रवृत्ति है आगे बढ़ते जाना। दुनिया के लिए प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत सूरज है। जब वह उगता है तो दिन होता है, धरती के एक हिस्से में उजाला होता है, तारीख बदल जाती है। दूसरे दिन फिर यही होता है लेकिन तारीख पीछे नहीं जाती। वह हर दिन के साथ आगे बढ़ती रहती है। इस तरह पूरा कैलेंडर बदल जाता है, साल बदल जाते हैं, दशक और सदियां बदल जाती हैं।

ब्रह्मांड में बड़ी दूरियों को नापने के लिए प्रकाशवर्ष का इस्तेमाल किया जाता है। इसका आसान अर्थ यह है कि एक साल में प्रकाश कितनी दूरी तय करता है। अगर ब्रह्मांड में स्थित किसी ग्रह से किरणें धरती की ओर आती हैं तो वे समय के साथ आगे ही आगे बढ़ती हैं, पीछे नहीं जातीं। यह नहीं हो सकता कि 2021 में एक किरण वहां से चली हो और वह धरती तक पहुंचे तो यहां 2014 का साल आ जाए!

अगर अंधेरे में तीली जलाएं तो प्रकाश की किरणें चारों ओर फैल जाएंगी। वे न तो एक ही स्थान पर सीमित रहेंगी और न सिकुड़कर तीली में समा जाएंगी।

क़ुरआन में अल्लाह/परमेश्वर ने प्रकाश का जो उदाहरण दिया है, उसका गहरा अर्थ है। प्रकाश का अर्थ ज्ञान, भविष्य, स्पष्टीकरण भी होता है। इन सबके साथ 'आगे बढ़ने' का भाव जुड़ा हुआ है।  

अगर ज्ञान प्राप्त करना बंद कर दें तो हानि होती है। उदाहरण के लिए, आज वैज्ञानिक इंटरनेट तकनीक को बेहतर बनाने के लिए अध्ययन व शोध कर रहे हैं। अगर वे कबूतर से चिट्ठी भेजने के ज़माने की पढ़ाई के अनुसार चलें तो देश पिछड़ जाएगा। वे भविष्य के लिए बेहतर तकनीक खोज रहे हैं।  

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अगर कोई यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा है तो उसे उसी के अनुसार ज्ञान प्राप्त करना होगा। वहां बारहखड़ी और ए बी सी ... की किताबों से काम नहीं चलेगा। ज्ञान आगे बढ़ते जाने का ही नाम है।  

इसी तरह भविष्य भी आगे है और स्पष्टीकरण का अर्थ खोलना, सामने लाना होता है। सामने वही लाया जाता है जो किसी चीज के पीछे छिपा हो, ढका हो।

यही क़ुरआन में कहा गया है- 'ऐ किताब वालो! तुम्हारे पास संदेष्टा आया है। वह अल्लाह की किताब की बहुत-सी उन बातों को तुम्हारे सामने खोल रहा है जिनको तुम छिपाते थे।' (5/15)

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