मुंबई, 25 मई (भाषा) जाने माने अभिनेता अनुपम खेर ने मंगलवार को फिल्म उद्योग में 37 साल पूरे कर लिये। अभिनेता ने कहा कि अगर उन्हें पहली फिल्म ‘सारांश’ नहीं मिली होती तो वह ये उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते।

वर्ष 1984 में आयी महेश भट्ट निर्देशित यह फिल्म एक बुजुर्ग दंपति की कहानी है जो अपने एकलौते बेटे की मौत के बाद कमरा किराये पर लेता है।

खेर तब महज 28 साल के थे जब उन्होंने फिल्म में एक सेवानिवृत्त मध्यम वर्गीय शिक्षक बी वी प्रधान का किरदार निभाया था जो अपना बेटा खो देता है।

इंस्टाग्राम पर अपने पोस्ट में अभिनेता ने कहा कि किसी कलाकार के तौर पर शुरुआत करने के लिए ‘सारांश’ से बेहतर फिल्म नहीं हो सकती।

अभिनेता ने लिखा, ‘‘सिनेमा में मेरी 37वीं सालगिरह। मेरी पहली फिल्म ‘सारांश’ के आज 37 साल पूरे हो गये। यह एक बेहतरीन शुरुआत थी जिसकी कोई क लाकार कल्पना कर सकता है। इसके कुछ दृश्य अब भी मेरे जेहन में हैं।’’

अभिनेता (66) ने लिखा, ‘‘मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि फिल्म के बाद मेरा भविष्य क्या होगा। मैं बस अपना सबकुछ देना चाहता था। अगर मैं आज फिल्मों से जुड़ा हूं तो यह सिर्फ और सिर्फ ‘सारांश’ की बदौलत है।’’

अभिनेता ने कहा कि वह भट्ट, राजश्री फिल्म्स और दर्शकों के शुक्रगुजार हैं जिनका प्यार और सहयोग मिला।

‘सारांश’ 1985 के अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा के ऑस्कर के लिए भारत की ओर से आधिकारिक रूप से भेजी गयी थी।

फिल्म में सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए वसंत देव ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था।

खेर ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से पढ़ाई की है। फिल्मों में अपने चार दशक लंबे कॅरियर में खेर ‘राम लखन’, ‘लम्हे’, ‘खेल’, ‘डर’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’, ‘डैडी’, ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’, ‘विजय’, ‘अ वेडनेसडे’ और ‘एम एस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ समेत करीब 518 फिल्मों में नजर आये।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया जिसमें ‘बेंड इट लाइक बेकहम’, ‘ब्राइड एंड प्रीजुडिस’, ‘सिल्वर लाइनिंग्स प्लेबुक’, ‘द बिग सिक’ और ‘द ब्वॉय विथ द टॉपनॉट’ शामिल हैं। वह ‘सेंस 8’ और ‘न्यू एम्सटर्डम’ सीरीज में भी नजर आये।

वर्ष 2002 की फिल्म ‘ओम जय जगदीश’ से अभिनेता ने निर्देशन में हाथ आजमाया।

फिल्म ‘डैडी’ और ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ में अभिनय के लिए वह दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं।