नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि बारहवीं कक्षा की बोर्ड की लंबित परीक्षा के संबंध में जल्द सुविचारित एवं सामूहिक निर्णय किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों से 25 मई तक विस्तृत सुझाव भेजने का आग्रह किया ।

बोर्ड की बारहवीं की लंबित परीक्षाओं को लेकर रविवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका । दिल्ली सरकार और अभिभावकों का एक वर्ग कोविड-19 महामारी के मद्देनजर परीक्षा रद्द करने के पक्ष में है जबकि एक अन्य वर्ग बाद में परीक्षा आयोजित करने का पक्षधर है ।

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षा स्थगित कर दी गई थी ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में दो घंटे से अधिक समय तक डिजिटल माध्यम से हुई बैकक में निशंक के अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे के अलावा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों व सचिवों ने भी हिस्सा लिया। यह बैठक 12वीं कक्षा की बोर्ड की लंबित परीक्षाओं एवं पेशेवर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं से संबंधित थी।

बैठक के बाद निशंक ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री की संकल्पना के अनुरूप यह बैठक काफी सार्थक रही और उन्हें काफी मूल्यवान सुझाव प्राप्त हुए ।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने राज्य सरकारों से 25 मई तक विस्तृत सुझाव भेजने का आग्रह किया है ।’’

केंद्रीय शिक्षा ने कहा,‘‘ मुझे विश्वास है कि हम 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के संबंध में सुविचारित एवं सामूहिक निर्णय तक पहुंचेंगे और जल्द से जल्द हमारे अंतिम फैसले की जानकारी देकर छात्रों एवं अभिभावकों के मन की अनिश्चितता को समाप्त कर सकेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस बात पर जोर देना चाहते हैं कि छात्रों एवं शिक्षकों की सुरक्षा और उनका भविष्य हमारे लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने इस उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिये राज्यों के शिक्षा मंत्रियों एवं अधिकारियों को धन्यवाद दिया ।

अधिकारियों के अनुसार, बैठक के दौरान केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के प्रस्तावित विकल्पों और उन्हें लागू करने की व्यवहार्यता के बारे में चर्चा की गई ।

छात्रों और अभिभावकों का एक वर्ग बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग की रहा है और सोशल मीडिया पर हैशटैग ‘कैंसिलबोर्डपरीक्षा’ अभियान चलाया है।

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव किया गया कि मुख्य विषयों की परीक्षा वर्तमान प्रारूप में करायी जाए और शेष विषयों के लिये अंक इन विषयों के पत्र में प्रदर्शन के आधार पर दिया जाए और इसके लिये ऑफलाइन परीक्षा आयोजित की जाए । बोर्ड ने कहा कि इस विकल्प के लिये सामाजिक दूरी सुनिश्चित करते हुए केंद्रों की संख्या बढ़ायी जा सकती है ।

उन्होंने बताया कि दूसरा विकल्प परीक्षा पैटर्न में बदलाव को लेकर प्रस्तावित किया गया । इसके तहत परीक्षा छात्रों के घर पर आयोजित करने का विकल्प सुझाया गया और इसके लिये परीक्षा की अवधि को 3 घंटे से घटाकर 90 मिनट करने और वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछने की बात कही गई । इस प्रारूप में छात्रों को चार में से किसी तीन विषय की परीक्षा देने का विकल्प होगा ।

वहीं, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को कहा कि दिल्ली सरकार सीबीएसई द्वारा 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा कराने के लिए विकल्पों की तलाश किए जाने के पक्ष में नहीं है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का टीकाकरण कराए बिना 12वीं की बोर्ड परीक्षा कराना बड़ी भूल साबित होगी। सिसोदिया ने कहा, ‘‘विद्यार्थियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर परीक्षा कराना बड़ी भूल साबित होगी। पहले टीकाकरण और उसके बाद परीक्षा। पूरे देश में 12वीं कक्षा के 1.5 करोड़ विद्यार्थी हैं और उनमें से 95 प्रतिशत की उम्र 17.5 साल से अधिक है। केंद्र को विशेषज्ञों से बात करनी चाहिए कि क्या उन्हें कोविशील्ड या कोवैक्सीन की खुराक दी जा सकती है।’’

सिसोदिया ने बताया कि उन्होंने लंबित 12वीं की बोर्ड परीक्षा और अन्य प्रवेश परीक्षाओं पर फैसला लेने के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में यह बात कही। वहीं, तमिलनाडु सरकार ने प्रस्ताव दिया कि कोविड-19 की स्थिति सुधरने के बाद राज्य में परीक्षा करायी जा सकती है।

राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोयामोझी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘ अन्य राज्यों की तरह तमिलनाडु भी 12वीं बोर्ड परीक्षा आयोजित करना चाहता है, क्योंकि यह छात्रों के कैरियर को लेकर महत्वपूर्ण होता है ।’’

कर्नाटक के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए 12वीं कक्षा की परीक्षा आयोजित करना महत्वपूर्ण है ।

गौरतलब है कि 14 अप्रैल को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं और 10वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई बैठक में किया गया था। ये परीक्षाएं 4 मई से 14 जून के बीच होनी थीं।

इसी तरह, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थानों ने भी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है।

भाषा दीपक

दीपक दिलीप

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