लोकसभा ने मंगलवार को गतिरोध के बाद राज्यों को अपनी ओबीसी सूची बनाने की शक्ति बहाल करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक पारित किया. विपक्षी दलों ने कानून का समर्थन किया लेकिन आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की मांग की और उनमें से कई ने भी जाति आधारित जनगणना की मांग की. ओवैसी ने संसद में ओबीसी विधेयक पर कहा कि सरकार ने ये बिल लाकर शाहबानो की परंपरा को बरकरार रखा है, महाराष्ट्र में मुसलमानों की 50 कास्ट जो पिछड़ी हैं उनकी कोई बात नहीं करता, सिर्फ मराठा आरक्षण की बात होती है, हमें सिर्फ इफ्तार की दावत और मुंह में खजूर मिलेगा, आरक्षण नहीं. 

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (AIMIM) सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर ओबीसी को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वास्तविक रूप से समुदाय के उत्थान के लिए बहुत कम काम किया गया है. उन्होंने ट्रेजरी बेंच की ओर भी रुख किया और हिंदी गाना- "जब प्यार किया तो डरना क्या" का इस्तेमाल किया और सरकार से आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने का आह्वान किया. 

ओवैसी ने कहा, "जब एससी कास्ट में हिंदू, बौद्ध आ सकते हैं तो फिर मुसलमानों को इसमें क्यों नहीं शामिल किया जा सकता है. 1950 के प्रेसिडेंशियल ऑर्डर से धर्म हटाया जाए. उनका कहना था कि मोदी सरकार क्यों डर रही है. 50 फीसदी की लिमिट क्रॉस कर दीजिए. उनका सरकार पर आरोप था कि आपकी मोहब्बत ओबीसी से नहीं, वोट से है. सांसद ने कहा कि महाराष्ट्र में मुसलमानों की 50 पिछड़ी कास्टों की कोई बात नहीं करता, सिर्फ मराठा आरक्षण की बात की जाती है." 

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बाद में ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा सरकार OBC समाज के हित में नहीं है, बल्कि सिर्फ़ उनके वोट के लिए है. आज ही के दिन 1950 में, मुसलमान और ईसाई दलितों को SC की लिस्ट से महरूम कर दिया गया था, सरकार जल्द से जल्द मजहब के बुनियाद पर आरक्षण को खत्म करे."

चर्चा के दौरान कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, शिवसेना सहित कुछ अन्य दलों के सदस्यों ने आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने पर विचार करने की सरकार से मांग की. कई विपक्षी सदस्यों ने जाति आधारित जनगणना कराने की भी मांग की.

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