गुवाहाटी, 22 मई (भाषा) कांग्रेस की महिला इकाई ने एक नाबालिग के ''यौन उत्पीड़न के आरोपी'' आईपीएस अधिकारी को हाल ही में असम के एक जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किये जाने के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन्हें पद से हटाने की मांग की।

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने राज्य के मुख्यमंत्री व गृह मंत्री हिमंत बिस्व सरमा को लिखे पत्र में दावा किया कि ऐसे अधिकारी जनता का भरोसा हासिल नहीं कर सकते।

देव ने पत्र में लिखा, ''बताया जा रहा है कि कथित तौर पर एक 13 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न करने वाले आईपीएस अधिकारी को जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जिसके खिलाफ असम पुलिस ने हाल ही में पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोप पत्र दायर किया था।''

पत्र में कहा गया है, ''असम अपराध अन्वेषण विभाग भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत जनवरी 2020 में दर्ज किए गए इस मामले की जांच कर रहा है।''

असम से संबंध रखने वाली देव ने पुलिस अधिकारी की नियुक्ति को तत्काल निलंबित करने की मांग की।

'पीटीआई-भाषा' ने असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, ''यह सरकार का आदेश है। मैं सरकार के आदेश पर टिप्पणी नहीं कर सकता।''

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि पुलिस ने 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी के खिलाफ करीब डेढ़ महीने पहले आरोप पत्र दायर किया था।

आईपीएस अधिकारी के खिलाफ असम पुलिस सेवा की एक महिला अधिकारी की नाबालिग बेटी के कथित यौन उत्पीड़न के लिये पिछले साल तीन जनवरी को पॉक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जब वह असम में पर्वतीय जिले का पुलिस अधीक्षक (एसपी) थे।

आरोप है कि एसपी ने 31 दिसंबर 2019 को नववर्ष की पार्टी रखी थी, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी किशोर बेटी के साथ शरीक हुई थी।

आरोपी अधिकारी ने जिला मुख्यालय में अपने आधिकारिक बंगले के एक कक्ष में नशे की हालत में लड़की का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया था।

इस कथित घटना के बाद उसका जिले से बाहर तबादला किया गया और गुवाहाटी में असम पुलिस मुख्यालय में तैनात कर दिया गया ।

असम के गृह एवं राजनीतिक विभाग आयुक्त व सचिव एम एस मनिवन्नन ने 14 मई को जारी आदेश कर आरोपी अधिकारी समेत विभिन्न आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया था।