नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने पिछले छह साल में मुद्रा योजना के तहत 28 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को करीब 15 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूरी किये।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिये आठ अप्रैल, 2015 को मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) की शुरूआत की थी।

वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘मुद्रा योजना के तहत 26 मार्च, 2021 की स्थिति के अनुसार बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 28.81 करोड़ लाभार्थियों के 15.10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज मंजूर किये।’’

विभाग के अनुसार इस योजना के तहत विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्रों और कृषि से जुड़ी गतिविधियों में आय-सृजन गतिविधियों के लिए तीन श्रेणियों - शिशु, किशोर और तरुण में 10 लाख रुपये तक के गारंटी-मुक्त ऋण प्रदान किए जाते हैं।

पिछले साल, सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये लगाये गये लॉकडाउन से पैदा कठिनाइयों से निपटने में मदद के लिए मई में घोषित आत्मानिर्भर भारत अभियान पैकेज के तहत छोटे कारोबारियों की मदद के लिये पीएमएमवाई की 'शिशु' श्रेणी के तहत कर्जदारों को 2 प्रतिशत ब्याज सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया।

शिशु श्रेणी के तहत लाभार्थियों को 50,000 रुपये तक का गारंटी मुक्त ऋण दिया जाता है।

ब्याज सहायता योजना का लाभ 31 मार्च, 2020 तक बकाया उन ऋणों को दिया गया, जो गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) श्रेणी में नहीं थे यानी जिनकी किस्तें लगातार आ रही थी।

पीएमएमवाई योजना की शिशु श्रेणी में मार्च 2020 के अंत तक 9.37 करोड़ रिण खाते चल रहे थे जिनमें 1.62 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था।

पिछले साल जिन कर्जदारों को रिजर्व बैंक की योजना के मुताबिक कर्ज किस्त चुकाने में रोक की अनुमति मिली, उनके लिये ब्याज सहायता योजना रोक अवधि पूरी होने के बाद 12 माह के लिये शुरू की गई यानी एक सितंबर 2020 से लेकर 31 अगस्त 2021 तक के लिये। अन्य कर्जदारों के लिये योजना एक जून 2020से शुरू होकर 31 मई 2021 तक है।

भाषा

रमण महाबीर

महाबीर