(टिम लक्हर्स्ट, प्रिंसीपल, साउथ कॉलेज, डरहम यूनिवसिर्टी )

लंदन, 23 मई (दि कन्वर्सेशन) बीबीसी ब्रिटेन के सांस्कृतिक मूल्यों के सबसे अहम प्रसारकों में एक है और वह सबसे प्रभावी तरीके से ‘सॉफ्ट पॉवर’ (असैन्य ताकत) का प्रतिनिधित्व भी करता है। इस बीच, नेटफ्लिक्स और अमेजन सहित नये मंचों की भले ही गहरी पैठ हो गई है लेकिन बीबीसी ने ब्रिटिश रेडियो और टेलीविजन के लिए स्थायी मानक स्थापित किए हैं।

स्काई, आईटीवी और चैनल-4 के कार्यकारी एक ऐसे मापदंड के रूप में उसकी भूमिका स्वीकार करते हैं जिसने ब्रिटिश प्रसारण की ख्याति बढ़ायी है। विचारशीलों के लिए यह लंबे समय से समाचार का भरोसेमंद स्रोत है। वैश्विक स्तर पर इसकी सटीकता और ईमानदारी के लिए ख्याति है।

इसलिए, हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि लॉर्ड डायसन की कॉरपोरेशन में दी गई रिपोर्ट और अब राजकुमारी डायना के कुख्यात साक्षात्कार से बीबीसी गुस्से का सामना कर रहा है। इस साक्षात्कार में डायना ने प्रिंस ऑफ वेल्स से शादी टूटने की विस्तृत जानकारी दी थी।

रिपोर्ट में पाया गया कि बीबीसी संवाददाता मार्टिन बशीर ने साक्षात्कार करने के लिए ‘छलपूर्ण व्यवहार’ किया था और बीबीसी ने जानबूझकर उसपर ‘पर्दा डाल’ दिया था।

तब के पैनोरमा वृत्तचित्र श्रृंखला के संवाददाता बशीर ने जिस प्रकिया के जरिये यह साक्षात्कार प्राप्त किया, जिसे उनके प्रतिद्वंद्वी भी प्राप्त करना चाहते थे, पहेली ही रही एवं इसका प्रसारण 1995 में किया गया। लेकिन अब वरिष्ठ सेवानिवृत्त न्यायाधीश लॉर्ड डायसन ने पाया है कि वह घोटाला था और कॉरपोरेशन ने ‘‘उच्च ईमानदारी और पादर्शिता के उच्च मानकों का पालन नहीं किया जो उसकी पहचान है।’’

अब यह तथ्य स्थापित हो चुका है कि बशीर ने फर्जी बैंक के स्टेटमेंट बनाए और उन्हें डायना के भाई अर्ल स्पेंसर को दिखाए ताकि उनका भरोसा जीत कर उनकी बहन तक पहुंच बनाई जा सके। बाद में बशीर ने अपने नियोक्ता से झूठ बोला, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोप अकेले उससे जुड़े हैं। यह न केवल एक पूर्व संवाददाता पर कलंक है बल्कि कॉरपोरेशन के लिए काला दिन है ।

पैनोरमा पर राजकुमारी डायना की उपस्थिति, कार्यक्रम के लिए बड़ा बदलाव था और जाहिर तौर पर बीबीसी के लिए भी। इस कार्यक्रम को, प्रसारण होने पर करीब दो करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। बाद में भी और लोगों ने इसे देखा। यह वह पल था जब डायना ने प्रिंस चार्ल्स के साथ अपनी शादी में ‘‘हम तीन होने’ के बारे में बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका किसी अन्य से प्रेम संबंध था और बताया कि चार्ल्स के कैमिला पार्कर बॉउल्स (अब उनकी पत्नी और डचेज ऑफ कॉर्नवाल) से संबंधों के चलते वह खुद की जिंदगी को बेकार समझने लगी थीं।

एक जो कमी रह गई थी

कुल मिलाकर इस साक्षात्कार ने कई बहसों और विवादों को जन्म दिया। मैं वर्ष 1995 में बीबीसी का संपादक था। मैं मानता था कि पत्रकारिकता की सटीकता एवं ईमानदारी के लिहाज से ऐसे महत्वपूर्ण समाचार वाले अहम कार्यक्रम की बार-बार जांच की गयी होगी। डायसन की रिपोर्ट का मूल झटका यह है कि लेकिन ऐसा नहीं किया गया था। उससे भी खराब बात यह कि बीबीसी को ऐसा करने के लिए मजबूर ही नहीं किया गया।

बशीर स्कूली बच्चे वाली चालाकी करके बच गया कि उसके संपादक दिवंगत स्टीव हेवलेट चाहते थे कि उनके अपने संवाददाता इस तरह की स्टोरी करें।

डायसन की रिपोर्ट में विशेषतौर पर हेवलेट को बाद की लीपापोती की कार्रवाई से मुक्त किया गया और लिखा गया है ‘‘ उनके आदेश कार्यक्रम से परे नहीं थे और उनकी पत्नी राशेल क्रेलिन ने बशीर के व्यवहार में हेवलेट के शामिल होने या जानकारी होने पर ‘विस्तृत और मजबूत जवाब’’ दिया था।

उस समय बीबीसी के समाचार निदेशक रहे और बाद में महानिदेशक बने टॉनी हॉल ने इस बीच बशीर को संदेह का लाभ दिया। अब लॉर्ड हाल ने स्वीकार किया है कि वर्ष 1996 की उनकी आंतरिक जांच में बशीर और पैनोरमा को मुक्त कर दिया गया क्योंकि ‘‘(आरोप सिद्धि के लिए जो जरूरी था, वह नहीं मिला।’’लॉर्ड डायसन ने और कटु लहजे में कहा। उन्होंने कहा कि जांच ‘‘खेदजनक रूप से निष्प्रभावी’ रही।

यह बीबीसी की साख की बात है कि उसने बिना किसी आपत्ति के डायसन की रिपेार्ट को स्वीकार किया। महानिदेशक टिम डेवी कहते हैं कि ‘उस समय क्या हुआ उसकी तह तक जाने के लिए उसे बड़ी कोशिश करनी चाहिए थी।’’ वह मानते हैं कि अब वर्ष 1995 के मुकाबले ‘‘ बेहतर प्रक्रिया और प्रणाली है।

हम में से जो बीबीसी के प्रति प्रेम और सम्मान बनाये हुए हैं उन्हें उम्मीद होगी कि वे सही साबित होंगे और यह इसलिए नहीं कि बीबीसी के आलोचक और दुश्मन मंडरा रहे हैं। उनका तर्क इस खेदजनक गलती और अफसोसनाक तथ्य से मजबूत हुआ है कि लंबे समय तक सुधार नहीं गया जिसकी जरूरत थी।

अखबारों, खासतौर पर संडे टाइम्स, दि डेली मेल और दि मेल ऑन संडे ने इन आरोपों के प्रति ध्यान आकर्षित किया जो अब सच दिख रहे हैं।

दूसरों द्वारा निगरानी परक रिपोर्टिंग ने भी इस दुखद सच की पहचान की कि बीबीसी प्रबंधकों को सबूतों की जांच करने के बजाय व्हिसिलब्लोअर के होने को लेकर अधिक चिंता थी। ऐसी असफलता का अब मतलब होगा कि बीबीसी को पूर्व की संपादकीय गलतियों के मुकाबले कहीं अधिक नुकसान होगा।

जिम्मेदारी लेनी होगी

विस्तार, महत्वाकांक्षा और उम्र को देखा जाए तो बीबीसी की बड़ी गलतियां ज्यादा नहीं हैं। उसने वर्ष 1926 के आम हड़ताल में सरकार के साथ बहुत करीब से काम किया था। पैनोरमा के 1984 के वृत्तचित्र ‘मैगी मिलिटेंट टेंडेंसी’ में दावा किया गया था कि कंजर्वेटिव सांसदों के घोर दक्षिणपंथी संगठन से संबंध है और इसकी कीमत बीबीसी को 2,90,000 पाउंड के क्षतिपूर्ति के रूप में चुकानी पड़ी थी।

वर्ष 1986 में अमेरिका द्वारा लीबिया पर बीबीसी की रिपोर्टिंग से मार्गरेट थैचर सरकार के साथ तनाव पैदा हो गया था। नवीनतम घटना में जिम्मी सैविली यौन उत्पीड़न मामले ने गहरे जख्म दिए थे। न्यूजनाइट में लॉर्ड मैक्ल्पाइन द्वारा वेल्स के ब्रैन इस्टीन बाल गृह में बच्चों के उत्पीड़न की गलत खबर के बाद जॉर्ज इनट्विस्टल ने महानिदेशक पद से इस्तीफा दिया।

यह संयोग है कि आज बीबीसी की ऐसी फजीहत बोरिस जॉनसन की कंजर्वेटिव सरकार से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच हो रही है।

दि फाइनेंशियल टाइम्स की खबर के मुताबिक लेखकों, शिक्षाविदों और निर्माताओें के प्रभावशाली समूह का मानना है कि सरकार की परामर्श समिति बीबीसी की आय में पर्याप्त कटौती की अनुशंसा कर सकती है।

युवाओं का भरोसा जीत चुकी संपन्न स्ट्रीमिंग सेवा से कड़ी टक्कर मिलने से बीबीसी पर खतरा बढ़ गया है। अपने इतिहास में पहले के मुकाबले उसे आज कहीं अधिक मित्रों की जरूरत है। दुश्मन मंडरा रहे हैं और डायसन की रिपोर्ट ने माहौल को और गर्म कर दिया है। बीबीसी ऐसे किन्हीं और सबूतों के साथ अपने दोस्तों के अलग होने का जोखिम नहीं ले सकता कि उसकी पत्रकारिकता जो कि उसकी शान है, वह पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं है।

दि कन्वर्सेशन

धीरज नरेश

नरेश