नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन के लिए बिना कामयाबी के कई साल दिल्ली में गुजार देने वाले मनोज बाजपेयी को तीसरी बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड से नवाजा गया है. बिहार के पश्चिम चंपारण से आने वाले बाजपेयी को 'भोंसले' फिल्म में शानदार अभिनय के लिए 67वें राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में बेस्ट एक्टर चुना गया. इस फिल्म को दर्शकों के मामले में काफी सफलता नहीं मिली, लेकिन मार-धाड़ और लव स्टोरी से अलग हटकर फिल्म पसंद करने वालों ने इसे देखा और सराहा. 

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क्या है 'भोंसले' फिल्म की कहानी 

ये फिल्म पूरी तरह से एक किरदार गणपतराव भोंसले (मनोज बाजपेयी) पर आधारित है, जोकि एक रिटायर्ड मुंबई पुलिसकर्मी है और उसे चौथे स्टेज का ब्रेन ट्यूमर है. वो मुंबई की एक चॉल में छोटे से कमरे में रोजमर्रा के काम करते हुए अकेले अपना जीवन बिता रहा होता है, तभी उसके बगल वाले कमरे में उत्तर भारत (प्रवासी) से सीता नाम की लड़की अपने भाई के साथ रहने आती है. दरअसल ये फिल्म मुंबई में प्रवासियों के संघर्ष पर है. 

ये फिल्म मराठी मानुष और प्रवासियों के बीच संघर्ष को दिखाती है. स्थानीय लोगों के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले भोंसले प्रवासियों के हक़ के लिए लोकल नेता से दुश्मनी मोल लेते हैं. 

'भोंसले' 26 जून, 2020 को ओटीटी प्लेटफॉर्म 'सोनी लिव' पर रिलीज़ हुई थी. 'भोंसले' को एशियन फिल्म फेस्टिवल बार्सिलोना में 'बेस्ट स्क्रीनप्ले' और 'बेस्ट डायरेक्टर' के अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है. 

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इन तीन फिल्मों के लिए मनोज बाजपेयी को मिला है नेशनल अवॉर्ड

सत्या, पिंजर, शूल, गैंग्स ऑफ वासेपुर और अलीगढ़ जैसी फिल्मों में अभिनय करने वाले मनोज बाजपेयी को सत्या के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला, इसके बाद उन्हें पिंजर के लिए स्पेशल ज्यूरी नेशनल अवॉर्ड मिला और अब उन्हें तीसरी बार 'भोंसले' फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है. 

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