बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के पहले फेज में 71 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 1 अक्टूबर से शुरू हो गई है. पहले फेज के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होना है. इच्छुक उम्मीदवार अपना नामांकन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं. हालांकि, एनडीए और महागठबंधन दोनों में सीट शेयरिंग का मसला अभी तक सुलझ नहीं पाया है.

सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों में ही एक सहमति नहीं बन पाई है. बुधवार को एनडीए की सीट शेयरिंग के लिए लंबी बैठक चली. ऐसा माना जा रहा था की शाम तक फैसला हो जाएगा लेकिन इस बारे में कोई खबर सामने नहीं आई. वहीं, महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर असमंजस बना हुआ है.

ऐसे में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है. पहले फेज के 71 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रहा है.

एनडीए में कहां फंसा है पेंच

एनडीए में बीजेपी के साथ जेडीयू और एलजेपी सहयोगी पार्टियां हैं. वहीं, अब जीतन राम मांझी भी एनडीए का हिस्सा बन गई है. एलजेपी पहले से ही जेडीयू और मांझी को लेकर तेवर दिखा रही है. ऐसे में जेडीयू ने सीट शेयरिंग का मसला बीजेपी के पाले में डाल दिया है. वहीं, जेडीयू जहां बिहार में बड़े भाई की भूमिका में दिखना चाहती है तो बीजेपी बराबर की भूमिका में रहना चाहती है.

माना जा रहा है कि जेडीयू और बीजेपी 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. इसके साथ ही चिराग और मांझी के बीच 43 सीटों का बंटवारा कर सकती है. हालांकि, अगर चिराग सीटों के नंबर पर अपनी सहमती नहीं दी तो सारा खेल बिगड़ सकता है.

महागठबंधन में बिगड़ता खेल

महागठबंधन की सहयोगी पार्टियों में से मांझी और कुशवाहा पहले ही अलग रास्ता अपना चुके हैं. वहीं, मुख्य रूप से गठबंधन में आरजेडी और कांग्रेस दिख रही है. हालांकि, मुकेश सहनी की VIP पार्टी भी दोनों पार्टियों के फैसले का इंतजार कर रही है. लेकिन आरजेडी और कांग्रेस सीट शेयरिंग पर अभी तक कोई सहमति नहीं बना सके हैं.