अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के कल्याण पर संसद की स्थायी समिति के प्रमुख और भाजपा सांसद किरीट सोलंकी ने बृहस्पतिवार को कहा कि हाथरस कांड की दलित पीड़िता का अंतिम संस्कार देर रात में किये जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई से लोगों में गुस्सा है और उत्तर प्रदेश पुलिस को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए.

हाथरस कांड को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए सोलंकी ने कहा कि वह घटना की कड़ी निंदा करते हैं और मामले में दुष्कर्म के आरोप सिद्ध होने पर दोषियों को फांसी पर लटकाया जाना चाहिए.

सोलंकी ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस जघन्य अपराध के लिए दोषी पाये जाने वाले लोगों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए. और यदि सामूहिक दुष्कर्म के आरोप साबित हो जाते हैं तो उन्हें कानून के अनुसार फांसी पर लटकाया जाना चाहिए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘समिति इस घटना का गंभीरता से संज्ञान लेगी और समिति के सदस्यों के साथ इस बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा कि इस मुद्दे को किस तरह लिया जाए.’’

हालांकि उत्तर प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में पता चला है कि 19 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म नहीं किया गया था.

घटना का उल्लेख करते हुए सोलंकी ने कहा, ‘‘मैंने जो खबरें देखी हैं, उनके मुताबिक पुलिस ने रात में लड़की के शव का दाह संस्कार करके जो किया उससे लोग बहुत असंतुष्ट हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस को अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए.’’

दलित नेता सोलंकी अहमदाबाद (पश्चिम) से लोकसभा सदस्य हैं और तीसरी बार संसद में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

सत्तारूढ़ भाजपा के एक और दलित सांसद हंसराज हंस ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पार्टी की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को हाथरस कांड की पीड़िता के जल्दबाजी में अंतिम संस्कार के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

पीड़िता के कुछ परिजनों ने आरोप लगाया था कि देर रात में उनके विरोध के बावजूद जबरन अंतिम संस्कार किया गया और शव को कुछ रीति-रिवाज पूरा करने के लिहाज से घर ले जाने के उनके अनुरोध को नहीं माना गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखे पत्र में हंस ने अनुरोध किया है कि उनकी सरकार को पीड़िता को न्याय दिलाना चाहिए और भविष्य में किसी के अंदर इस तरह का कृत्य करने का दुस्साहस नहीं होना चाहिए.