गुजरात में मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी ने इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद अब सभी को नए चेहरे का इंतजार है. हालांकि, ये सवाल सभी के जहन में है कि आखिर विजय रुपाणी ने सीएम पद से इस्तीफा क्यों दिया. विजय रुपाणी की ऐसी कौन सी कमजोरी थी जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. रुपाणी ने सीएम पद पर अपने 5 साल पूरे किए और इस बीच वह किसी विवाद में नहीं फंसे तो फिर ऐसा क्या हो गया कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

विजय रुपाणी को हटाए जाने की सबसे बड़ी वजह है अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव, जिससे बीजेपी किसी भी तरह से हलके में नहीं लेना चाहती है. बीजेपी को गुजरात में चुनाव जीतने के लिए एक लाइम लाइट चेहरा चाहिए जो विधानसभा में जीत सुनिश्चित करे. यही वजह है कि विजय रुपाणी का जाना पहले से ही तय माना जा रहा था.

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गुजरात में सीएम को बदलने की पटकथा पहले से ही लिखी जा चुकी थी. बस इसके लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा था. इसके लिए बीजेपी ने सही समय विजय रुपाणी के 5 साल पूरे होने को तय किया था.

बता दें, विजय रुपाणी साल 2016 में आनंदीबेन पटेल की जगह पर गुजारत के सीएम नियुक्त किए गए थे. वहीं, 2017 में विजय रुपाणी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था. लेकिन इस चुनाव को जीतने के लिए बीजेपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद चुनाव जीतने के लिए मोर्चा संभालना पड़ा था.

विजय रुपाणी 5 साल तक सीएम पद पर रहने के बावजूद राजनीतिक तौर पर अपना सियासी प्रभाव नहीं जमा सके. वह खामोशी से अपना काम करना पसंद करते हैं. इन पांच सालों में वह किसी भी बड़े विवाद में नहीं रहे. लाइम लाइट से दूर रहकर काम करनेवाले विजय रुपाणी के लिए शायद यहीं सियासी कमजोरी साबित हुई है. क्योंकि बीजेपी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीता सके. ऐसे में नए सीएम के चुनाव के लिए पहला दावेदार वही होगा जो राज्य में लाइम लाइट में दिख रहा.

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बीजेपी पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद किसी तरह की गलती नहीं करना चाहती है. इसी का परिणाम है कि बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड और कर्नाटक में अपना सीएम चेहरा बदल दिया है. अब इसी कड़ी में गुजरात में भी सीएम बदला जा रहा है.

वैसे तो गुजरात में सीएम के चेहरे के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं लेकिन इसमें नितिन पटेल रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं. हालांकि, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडवीया और परसोत्तम रुपाला भी इस रेस में खड़े हैं. जातीय समीकरण के अनुसार, पाटीदार समुदाय मायने रखता है और नितिन पटेल इस वजह से सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं और वह सीएम से ज्यादा लाइम लाइट में भी रहे हैं.

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