पिछले साल अगस्त में संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने एवं पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के बाद पहली बार जिला विकास परिषद के चुनाव में बीजेपी को घाटी में तीन सीटों पर जीत मिली और पार्टी के नेता अपनी इस जीत को ‘पंचायत से संसद’ तक की यात्रा के तौर पर देख रहे हैं.

पार्टी के लिए इसे अच्छी राजनीतिक शुरुआत बताते हुए बीजेपी के पूर्व विधान पार्षद सुरेंद्र अम्बरदार ने कहा, ‘‘ यह संज्ञान में लिया जाना महत्वपूर्ण है कि चुनाव लड़ने में बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे लड़के और लड़कियों ने उत्साह दिखाया. यह स्पष्ट तौर पर नए नेतृत्व का संकेत है.’’

अम्बरदार कश्मीर घाटी में डीडीसी चुनावों में पार्टी के प्रचार का काम देख रहे थे. उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘ तुलैल, खूनमोह और बेहद संवेदनशील काकपोरा में जीत हासिल करना अच्छी राजनीतिक शुरुआत है. हम ‘पंचायत से संसद’ तक के मिशन पर काम कर रहे हैं.’’

आतंकवाद का गढ़ माने जाने वाले पुलवामा के काकपोरा से कानून की पढ़ाई कर रही अंतिम वर्ष की छात्रा और बीजेपी उम्मीदवार मिनहा लतीफ को जीत हासिल हुई है. उनके पिता ने उन्हें यह चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया.

मिनहा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘मैं कानून की पढ़ाई कर रही हूं और अंतिम वर्ष की छात्रा हूं. मेरे पिता केंद्रशासित प्रदेश के लिए बीजेपी के (अल्पसंख्यक मोर्चे) के उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने डीडीसी चुनाव लड़ने के लिए मुझे टिकट की पेशकश की. मैं अपने जगह के लोगों के लिए कुछ करना चाहती थी, इसलिए मैंने यह पेशकश स्वीकार कर लिया और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में आने का निर्णय लिया.’’

मिनहा को इस सीट पर सिर्फ 14 वोटों से जीत हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और जिले का विकास भी सुनिश्चित करेंगी. वहीं उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले से जीत हासिल करने वाले भाजपा के उम्मीदवार एजाज अहमद खान ने अपनी जीत का श्रेय पार्टी द्वारा घाटी में किए गए कामों को दिया. वह पूर्व विधायक फाकिर मोहम्मद खान के बेटे हैं.

वहीं खूनमोह से जीत हासिल करने वाले इंजीनियर एजाज हुसैन का कहना है कि वे भाजपा के साथ 2006 से हैं और युवा मोर्चा का पदाधिकारी और सदस्य होने के साथ देश भर की विभिन्न जिम्मेदारियों को देख रहे हैं. उन्होने कहा कि डीडीसी चुनाव में यह जीत भारतीय झंडे की जीत है.