काहिरा, 26 मई (एपी) अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इजराइल और हमास के बीच 11 दिन की लड़ाई को खत्म करने वाले संघर्ष विराम को मजबूती प्रदान करने के मकसद से बुधवार को मिस्र और जॉर्डन की यात्रा की।

ब्लिंकन इजराइली और फलस्तीनी नेताओं के साथ गहन वार्ता के एक दिन बाद मिस्र की राजधानी काहिरा पहुंचे। मिस्र में उन्होंने राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसी और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद वह जॉर्डन के लिए रवाना हुए जहां वह बादशाह अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात करेंगे।

ब्लिंकन ने युद्ध से तबाह गाजा के पुनर्निर्माण के लिए ‘‘अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने’’ का आह्वान करते हुए यह सुनिश्चित करने का भी वादा किया कि इस क्षेत्र के लिए दी जाने वाली कोई भी सहायता हमास तक न पहुंचे। वह हमास की प्रतिद्वंद्वी एवं अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्यता प्राप्त फलस्तीनी प्राधिकरण को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्लिंकन ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिश में मिस्र और जॉर्डन को अहम बताया। दोनों देश अमेरिका के अहम सहयोगी हैं और उनके इजराइल के साथ शांति समझौते हैं तथा अक्सर वे इजराइल और फलस्तीन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं।

इजराइली और फलस्तीनी नेताओं के साथ मंगलवार को बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता कराने की अभी कोई योजना नहीं है क्योंकि पिछले प्रशासनों की ये कोशिशें विफल हो चुकी हैं।

इसके बजाय उन्होंने ‘‘बेहतर माहौल’’ बनाने की उम्मीद जताई जिससे शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो।

काहिरा में ब्लिंकन ने बुधवार को अल सिसि से करीब दो घंटे तक बैठक की। इसके बाद अमेरिकी राजनयिक कर्मियों से बैठक की। उन्होंने मिस्र को वास्तविक और प्रभावी साझेदार बताया जिसने गाज़ा जंग को खत्म कराने में सहायता की।

अल सिसि ने पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से बात की थी जिसके बाद संघर्ष विराम की घोषणा की गयी।

जॉर्डन जाने से पहले ब्लिंकन ने कहा, “ हमारा दृढ़ता से मानना है कि फलस्तीनी और इज़राइली समानता के हकदार हैं। उन्हें सुरक्षा से रहने और स्वतंत्रता, अवसर और गरिमा का समान रूप से अधिकार है।”

गाज़ा की 11 दिन की लड़ाई में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई है जिसमें अधिकतर फलस्तीनी हैं और गरीब तटीय क्षेत्र में भारी तबाही मची है।

अरब लीग के पूर्व महासचिव अहमद अबूल गैयत ने कहा कि क्षेत्र के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता अहम है। गाज़ा युद्ध से पहले बाइडन प्रशासन ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपनी विदेश नीति के केंद्र में चीन और ईरान को रखा।

मिस्र के पूर्व विदेश मंत्री अबूल गैयत ने सऊदी के दैनिक ‘अशरक- अल अवसत’ में लिखे लेख में कहा दोनों पक्ष खुद से बातचीत की मेज़ पर नहीं आ पाएंगे क्योंकि उनके बीच खाई पहले से बहुत गहरी हो चुकी है।

उन्होंने कहा, “ अमेरिका के किसी भी प्रभावी भूमिका के बिना हमें कुछ हासिल नहीं होगा बल्कि हिंसा का चक्र बढ़ेगा और बेगुनाह लोगों का खून बहेगा।”

अमेरिका का एक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मदद हमास के हाथों में ना जाए जिसे अमेरिका और इज़राइल आतंकी समूह मानते हैं और वह इज़राइल के अस्तित्व का विरोध करता है।

गाज़ा में हमास के नेता याहया सिनवार ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि समूह अंतरराष्ट्रीय पुन:निर्माण सहायता का स्वागत करता है पर इज़राइल से आने वाली सहायता उसे स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने वादा किया कि एक पैसा भी हमास की सैन्य इकाई या हमास को नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमास को बाहरी स्रोतों से पर्याप्त सैन्य सहायता मिलती है।

उन्होंने हमास की कीमत पर फलस्तीनी प्राधिकरण को मजबूत करने की कोशिश करने पर ब्लिंकन की आलोचना भी की और कहा कि वे फलस्तीनी विभाजन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिकि राब ब्लिंकिन की यात्रा को गति देने के लिए बुधवार को इज़राइल में थे।

ब्लिंकन के संदेश से सुर में सुर मिलाते हुए राब ने कहा कि ब्रिटेन हमास के रॉकेट हमलों से इज़राइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है और कोशिश करेगा कि सहायता का धन हमास को न पहुंचे। उन्होंने साथ में उम्मीद जताई कि संघर्ष विराम के प्रयास व्यापक क्षेत्रीय शांति की कोशिशों का रास्ता बनाएं।

ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका राष्ट्रपति महमूद अब्बास की प्रतिद्वंद्वी सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहा है जिनके बलों को 2007 में हमास ने गाज़ा से खदेड़ दिया था। अब्बास की फलस्तीनी प्राधिकरण इज़राइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में स्वायत्त क्षेत्रों पर शासन करता है।

अब्बास वेस्ट बैंक गाज़ा और येरूशलम--जिन इलाकों पर 1967 के युद्ध में इज़ाइरल ने कब्जा कर लिया था, को मिलाकर एक स्वतंत्र राष्ट्र स्थापित करने की उम्मीद में हैं।

ब्लिंकन ने फलस्तीनियों के लिए एक प्रमुख राजनयिक संपर्क कार्यालय को पुन: खोलने की योजना की घोषणा की है और ट्रंप प्रशासन की प्रमुख नीतियों को पलटते हुए करीब चार करोड़ डॉलर की नयी सहायता राशि की भी घोषणा की है।