.. राजीव शर्मा ..

भारत में ब्रिटिश राज हो या मुगलों की हुकूमत या उससे पहले राजा/महाराजाओं का दौर ... हमें बहुत ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है। वे शासक थे और उन्होंने वही किया जो एक शख्स अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए करता है, अच्छा-बुरा सबकुछ। हां, उनका तुलनात्मक अध्ययन करना चाहिए। उनके शासन और व्यक्तित्व के दोनों पक्षों (सकारात्मक/नकारात्मक) का निष्पक्ष विश्लेषण करना चाहिए।  

जैसे- एक मुस्लिम शासक (अभी नाम भूल रहा हूं) जब भारत आया और उसे प्यास लगी तो उसने पानी मांगा। अचानक उसने देखा कि कुछ लोग गाजे-बाजे के साथ सुंदर कपड़ों में ढककर कोई चीज ला रहे हैं। वह हैरान रह गया। उसने पूछा, 'यह क्या है?' जवाब मिला, 'आपके लिए सोने के प्याले में बहुत शान के साथ पानी लेकर आ रहे हैं!' इस पर उसने कहा कि 'अगर मैं इतने ऐशो-आराम का आदी होता तो मैदान फतह करता यहां तक नहीं पहुंचता।' उसने अपने सिर से लोहे का टोप उतारा और उसमें खुद पानी भरकर पिया, जैसे कि वह युद्ध के दौरान पिया करता था।

दूसरी मिसाल वाजिद अली शाह की दी जा सकती है। कहते हैं कि जब उन्हें अंग्रेज पकड़ने आए तो वे इस वजह से सुरक्षित जगह की ओर नहीं भाग सके क्यों​कि कोई उन्हें जूते पहनाने वाला नहीं था!  

औरंगजेब के बारे में भी कुछ ऐसा ही है। वह एक सख्त प्रशासक था। शासन का हिसाब-किताब खुद चेक करता था। ​फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं करता था। यहां तक उसकी अंतिम यात्रा, कफन-दफन भी बहुत सादगी से हुआ। उसकी कब्र खुले आसमान के नीचे और कच्ची है। लेकिन यह भी कहा जाता है कि औरंगजेब ने न तो एक नमाज छोड़ी और न ही अपने किसी भाई को छोड़ा। आज 30 अगस्त है। आज ही के दिन 1659 में उसने अपने बड़े भाई दारा शिकोह की हत्या की थी।

इसी तरह अगर अंग्रेजों की बात करें तो वे बाइबल पढ़ते थे, चर्च जाते थे। बाइबल में दूसरों पर दया करने, हृदय में करुणा का भाव रखने पर बहुत जोर दिया गया है, लेकिन खुद अंग्रेजों ने अपने शासन के दौरान हम भारतीयों के प्रति कितनी करुणा, दया भावना रखी, यह बताने की जरूरत नहीं है।  

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इसलिए पिछले किसी भी ज़माने के लिए इस भ्रम में न पड़ें कि वह सबसे अच्छा या स्वर्णिम युग था। पूरी तरह अच्छा ज़माना कोई नहीं रहा, सबमें खूबियां और कई खामियां मौजूद थीं। अच्छा ज़माना वह हो सकता है जो भविष्य में आएगा। उसे अच्छा या बुरा बनाना हम पर ही निर्भर करता है। जहां लोग ​मिल-जुलकर रहें, सांप्रदायिकता और जातिवाद का भेदभाव समाप्त हो, हर किसी के जीवन की गरिमा का सम्मान हो, बेरोजगारी, भुखमरी, बीमारी जैसी समस्याओं का विवेकपूर्ण समाधान हो, प्रकृति का संरक्षण हो ... वही ज़माना सबसे अच्छा है।

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