केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) चारा घोटाले में दोषी पाए गए लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर यहां उच्च न्यायालय में मंगलवार को दाखिल अपने जवाब में दावा किया कि राजद अध्यक्ष ने दुमका कोषागार से गबन के मामले में अब तक एक दिन की भी सजा नहीं काटी है, इसलिए उन्हें इस मामले में अभी जमानत देने का कोई भी पुख्ता आधार नहीं बनता है. हालांकि लालू के वकीलों ने दावा किया है कि लालू ने इस मामले में अपनी आधी सजा काट ली है.

चारा घोटाले के तहत दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये के गबन के मामले में लालू को विशेष सीबीआई अदालत ने 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी थी और दुमका मामले में जमानत मिलने पर लालू यादव फिलहाल जेल से बाहर आ सकेंगे, क्योंकि अब तक चारा घोटाले के जिन चार मामलों में उन्हें सजा मिली है, उनमें से तीन में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है.

सीबीआई ने अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 427 का उल्लेख करते हुए अपने जवाब में कहा कि लालू यादव को अब तक चारा घोटाले के चार विभिन्न मामलों में सीबीआई अदालतों ने सजा सुनायी है और दुमका मामले में उन्हें 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी है. सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि लालू को दुमका मामले में मिली सजा उन्हें चारा घोटाले के अन्य मामलों में मिली सजा के साथ ही चलेगी और अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 427 के तहत सजा देने वाली अदालत के ऐसा उल्लेख न करने पर अभियुक्त की सजाएं एक के बाद एक क्रमवार चलती हैं.

सीबीआई ने कहा कि लालू ने स्वयं सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष अपनी सजाओं को एक साथ चलाने का कोई अनुरोध नहीं किया था. ऐसे में फिलहाल लालू यादव तीन अन्य मामलों में जेल की सजा काट रहे हैं और उन सजाओं के पूरा होने के बाद ही दुमका मामले में उनकी सजा प्रारंभ होगी.

लालू यादव के वकील, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि उनके मुवक्किल मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय की बीमारी, गुर्दे संबंधी बीमारी, यकृत विकार, गुर्दे में पथरी एवं प्रोस्टेट जैसी तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं. अतः उन्हें बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होतवार में न रखकर रिम्स में भर्ती कराया गया है. उन्होंने अनुरोध किया था कि आधी सजा काट लेने और बीमार रहने के कारण उन्हें इस मामले में जमानत मिलनी चाहिए.