पेगासस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले पर एफिडेविड दाखिल नहीं करने जा रही है. केंद्र ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि, ऐसे मामलों में एफिडेविट दाखिल नहीं किया जा सकता है. केंद्र ने कहा कि उसके पास छिपाने को कुछ नहीं है और इसी वजह से उसने अपनी ओर से विशेषज्ञों की समिति का गठन करने की बात कही है. किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, यह सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं है.

यह भी पढ़ेंः राजधानी दिल्ली में बड़ा हादसा, मलकागंज में तीन मंजिला इमारत ढही

पेगासस जासूसी मामले पर सॉलिसीटर जनरल ने कहा, 'याचिकाकर्ता चाहते हैं सरकार लिख कर दे कि वह सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती है या नहीं. हमारा मानना है कि हलफनामा दाखिल कर इस पर बहस नहीं कर सकते. आईटी एक्ट की धारा 69 सुरक्षा के लिहाज से सरकार को निगरानी की शक्ति देती है. हम निष्पक्ष कमिटी बनाएंगे.'

कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमना ने सख्ती भी दिखाई. उन्होंने कहा कि कोर्ट जानना चाहता है कि आखिर सरकार इस मामले पर क्या कर रही है. सीजेआई ने कहा, 'हमें जानना है कि क्या कोई भी स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर सकता है? क्या इसका इस्तेमाल सरकार ने किया? क्या यह कानूनी तरीके से हुआ? सरकार अगर हलफनामा दाखिल नहीं करना चाहती तो हमें आदेश पारित करना पड़ेगा.'

यह भी पढ़ेंः अगले सात दिन कई राज्यों में जारी रहेगा बारिश का दौर, IMD ने दी चेतावनी

दरअसल, इससे पहले की सुनवाई में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल करने के लिए दो बार वक्त लिया था, लेकिन अब उसने सीधे तौर पर इनकार कर दिया.

वहीं, कोर्ट में याचिकाकर्ता पत्रकार एन राम की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जवाब दे क्योंकि नागरिकों की निजता का संरक्षण करना सरकार का कर्तव्य है. उन्होंने कहा स्पाइवेयर का इस तरह इस्तेमाल पूरी तरह अवैध है. सिब्बल ने कहा कि अगर सरकार अब कहती है कि हलफनामा दाखिल नहीं करेगी तो माना जाना चाहिए कि पेगासस का अवैध इस्तेमाल हो रहा है.

यह भी पढ़ेंः देश में घटे कोरोना वायरस के नए मामले, 24 घंटे में 27 हजार केस दर्ज