पेट्रोल-डीजल की कीमत दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि, पिछले दो दिनों से कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं होने से लोगों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन पहले से ही पेट्रोल-डीजल के दाम में इतना इजाफा हुआ है कि आम लोग परेशान हो रहे हैं. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से संकेत दिए जा रहे हैं कि जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों को कम करने के लिए बड़ा ऐलान कर सकती है.

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हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने कहा था कि, पेट्रोल और डीजल को माल एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाना हो सकता है, जो करों के ऊपर कर के असर को समाप्त करेगा और एकरूपता लायेगा. साथ ही खुदरा कीमतों को तार्किक स्तर पर लाने के लिये केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है.

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अभी केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क की एक निश्चित दर वसूलती है, जबकि राज्य अलग-अलग दरों पर वैट शुल्क लगाते हैं. पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारें उत्पाद शुल्क व वैट के नाम पर 100 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं. इस वजह से 35 रुपये का पेट्रोल विभिन्न राज्यों में 90 से 100 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.

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ऐसे में यदि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत शामिल करती है तो देश भर में ईंधन की एक समान कीमत होगी. कीमतें घटकर आधी हो सकती हैं. हालांकि, इससे सरकार की कमाई घटने का खतरा है इसलिए पेट्रोलियम पदार्थों को GST के दायरे में लाने का फैसला आसान नहीं है.

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