अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने तालिबान के नेता अब्दुल गनी बरादर के साथ काबुल में सोमवार को बैठक की. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि आतंकवादी समूह द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी पर कब्जा करने के बाद से दोनों पक्षों के बीच ये सबसे बड़ी आमने-सामने की बैठक थी. 

अमेरिका के अफगानिस्तान से दो दशक के खर्चीले युद्ध के बाद अपनी सेना को निकालने के काम के पूरा होने से दो हफ्ते पहले ही तालिबान ने अफगानिस्तान में 15 अगस्त को सत्ता पर कब्जा कर लिया था. इससे अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी को देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात जाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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सीआईए के निदेशक विलियम जे बर्न्स ने सोमवार को बबरादर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की. राष्ट्रपति जो बिडेन का अपने शीर्ष जासूस, विदेश सेवा के एक अनुभवी को भेजने का निर्णय, काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लोगों को निकालने के प्रयास के बीच आया है, जिसे राष्ट्रपति ने "इतिहास में सबसे बड़े, सबसे कठिन एयरलिफ्ट में से एक" कहा है.

15 अगस्त को तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को अपने नियंत्रण में ले लिया था. इससे पहले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात भागना पड़ा था.

सीआईए ने तालिबान की बैठक पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन चर्चा में संभावित रूप से अमेरिकी सेना के लिए अमेरिकी नागरिकों और अफगान सहयोगियों के एयरलिफ्ट को समाप्त करने के लिए 31 अगस्त की समय सीमा शामिल थी.

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तालिबान शासन से बचने के लिए बेताब अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ-साथ अफगान सहयोगियों के हजारों नागरिकों को निकालने में सहायता करने के लिए बिडेन प्रशासन पर कुछ सहयोगियों का दबाव है कि वे अमेरिकी सेना को 31 अगस्त की समय सीमा से परे देश में रखें.  

हालांकि, तालिबान के एक प्रवक्ता ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और ब्रिटेन ने युद्धग्रस्त देश से अमेरिकी नेतृत्व वाली सेना की वापसी के लिए 31 अगस्त की समय सीमा बढ़ाने की मांग की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. 

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2018 में अपनी रिहाई से पहले पाकिस्तानी जेल में आठ साल बिताने वाले बरादर ने कतर में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में तालिबान के मुख्य वार्ताकार के रूप में काम किया, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी सेना की वापसी पर ट्रम्प प्रशासन के साथ एक समझौता सम्पन्न हुआ था. 

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