दिल्ली की सिंघू सीमा पर सोमवार को करीब 32 किसान संगठनों के नेता केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में एक दिन के लिए भूख हड़ताल पर बैठे. किसान संगठनों ने दावा किया कि देशभर में अनेक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन भी आयोजित किए गए.

भूख हड़ताल सुबह आठ बजे शुरू हुई और शाम पांच बजे तक चली. गौरतलब है कि केंद्र के साथ कृषि कानूनों को लेकर हुई अब तक की वार्ता बेनतीजा रही है. किसानों का प्रदर्शन तीन हफ्ते से चल रहा है और किसान संघों का दावा है कि इस आंदोलन में अब और लोग शामिल हो सकते हैं.

यूनाइटेड फार्मर्स फ्रंट ने कहा कि नेताओं ने बीते 18 दिन में दिल्ली की सीमाओं पर कथित रूप से जान गंवाने वाले 20 प्रदर्शनकारियों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नये कृषि कानूनों को ‘किसान विरोधी और आम आदमी विरोधी’ करार देते हुए सोमवार को कहा कि इनसे बेतहाशा महंगाई बढ़ेगी और इससे केवल कुछ पूंजीपतियों को फायदा होगा. प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में आम आदमी पार्टी के दफ्तर में एक दिन के अनशन में शामिल हुए केजरीवाल ने कहा कि नये कृषि कानून ‘महंगाई को लाइसेंस’ देने वाले हैं.

केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून कहता है कि लोग जितना चाहें, जमाखोरी कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मैं पार्टियों से किसानों के मुद्दे पर गंदी राजनीति नहीं करने की अपील करता हूं. ये कानून किसान विरोधी और आम आदमी विरोधी हैं और कुछ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए हैं. इन कानूनों से जमाखोरी के जरिये बहुत महंगाई बढ़ेगी.’’

केजरीवाल ने कहा कि इन कानूनों की वजह से गेहूं आने वाले सालों में चार गुना महंगा हो जाएगा. दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में सोमवार को उपवास रखा. एक ट्वीट में गोयल ने कहा, ‘‘आज किसानों के एक दिवसीय उपवास के समर्थन में दिल्ली विधानसभा में गांधी जी की प्रतिमा के नीचे एक दिन के उपवास पर बैठा हूं.’’

भूख हड़ताल पर बैठे किसान नेताओं में शामिल शिव कुमार कक्का ने कहा कि अनशन का मुख्य उद्देश्य मुद्दे की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है. उन्होंने कहा, ‘‘हमें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है. चूंकि रेलगाड़ियां नहीं चल रही हैं इसलिए किसान यहां नहीं आ पा रहे हैं, जो आ रहे हैं उन्हें भी रोका जा रहा है.’’

पंजाब और हरियाणा में किसानों ने जिला आयुक्त कार्यालयों के बाहर नारेबाजी की और विरोध मार्च निकाला. प्रदर्शनकारियों के पंजाब से सटी शंभू सीमा पर इकट्ठा हो जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने अंबाला-पटियाला राजमार्ग को बंद कर दिया. जब उन्हें राष्ट्रीय राजधानी की ओर से बढ़ने से रोक दिया गया तो सैकड़ों किसान हरियाणा-राजस्थान सीमा पर एकत्रित हो गए.

एक किसान नेता ने दावा किया, ‘‘पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से हजारों किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं और दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शनकारी किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है.’’

किसानों के विरोध प्रदर्शन की वजह से दिल्ली की कई सीमाएं सोमवार को भी बंद रहीं. इसके मद्देनजर दिल्ली की यातायात पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से लोगों को बंद रास्तों की जानकारी दी और उन्हें परेशानी से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों से आवागमन करने का परामर्श दिया.

केंद्र द्वारा सितंबर में लागू कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर विभिन्न राज्यों के किसान दिल्ली के सिंघू, टिकरी, गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली-नोएडा सीमा) पर दो हफ्तों से डेरा डाले हुए हैं.

यातायात पुलिस ने ट्वीट कर बताया,, ‘‘ सिंघू, औचंदी, प्याऊ मनियारी, सभोली और मंगेश सीमाएं बंद हैं. इसलिए यात्री वैकल्पिक लामपुर, सफियाबाद और सिंघू स्कूल टोल नाका बार्डर के रास्ते आवागमन करें. मुकरबा और जीटी करनाल रोड पर मार्ग बदला गया है. यात्री बाहरी रिंग रोड और एनएच-44 से बचें.’’

दिल्ली यातायात पुलिस ने कई ट्वीट कर बताया, ‘‘गाजियाबाद से दिल्ली आने वालों के लिए गाजीपुर बॉर्डर किसानों के प्रदर्शन की वजह से बंद रहेगा, इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे दिल्ली आने के लिए आनंद विहार, डीएनडी, चिल्ला, अप्सरा और भोपरा बॉर्डर के वैकल्पिक रास्तों को चुने.’’ इस बीच, पंजाब के एक आईटी पेशेवर किसानों के लिए अपनी तरह से लड़ाई लड़ रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से अक्टूबर में कुछ निजी काम से भारत आए भावजीत सिंह की लंबे समय तक यहां रहने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन दिसंबर में भी वह यहीं हैं और किसान आंदोलन के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही फर्जी खबरों का ट्विटर पर मुकाबला कर रहे हैं.

सिंह मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के निवासी हैं.

वह ट्विटर हैंडल - ट्रैक्टर2ट्विटर- के जरिये अभियान चला रहे हैं और 28 नवंबर से अब तक पूरी दुनिया के 25 लाख लोग इसे देख चुके हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं निजी काम से अक्टूबर के आखिर में भारत आया था लेकिन यह (किसान आंदोलन) शुरू हो गया और मैं यहीं रूक गया.’’

सिंह ने कहा कि उनका इरादा प्रदर्शन को लेकर सही सूचना प्रसारित करना है क्योंकि बहुत से लोग किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए अभियान चला रहे हैं.

सिंह के मित्र और स्वयंसेवक जसप्रीत सिंह ने कहा, ‘‘पैसे के बदले और किसी खास हित से प्रेरित यूजर्स ने ट्विटर के मंच का अतिक्रमण किया है. हमारा अभियान इसका मुकाबला करने के लिए है.’’

जसप्रीत ने कहा, ‘‘किसान ट्विटर का इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं. हम उन्हें इससे जोड़ना चाहते हैं. हमारे पास आईटी सेल नहीं है और सभी ट्वीट ‘वास्तविक’ हैं.’’

भावजीत सिंह ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया यह जानना चाहती है कि भारत में क्या हो रहा है तो वह फेसबुक या वॉट्सऐप पर नहीं जाती बल्कि ट्विटर पर जाकर देखती है कि क्या ट्रेंड कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘जब किसान विरोधी अभियान चरम पर था, तब हमने सोचा कि यह किसानों के ट्रैक्टर से ट्विटर पर जाने का सही समय है और इस तरह ‘ट्रैक्टर2ट्विटर’ का विचार आया.’’