नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री तथा अन्य लोगों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक दो मई के तुरंत बाद बुलाई जाएगी।

सरकार ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव ने लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी से इस संबंध में संपर्क किया है जो समिति में एक सदस्य होंगे।

हलफनामे में कहा गया, ‘‘सचिव (डीओपीटी) को अधीर रंजन चौधरी ने सूचित किया कि वह दो मई, 2021 तक बैठक में भाग लेने के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे।’’

इसने कहा, ‘‘इसके मद्देनजर कानून (दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम, 1946) की धारा 4ए के तहत समिति की बैठक दो मई, 2021 के तुरंत बाद बुलाई जाएगी।’’

केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल किया जो एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में सीबीआई में पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

हलफनामे में कहा गया है कि दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापन अधिनियम, 1946 की धारा 4ए के तहत सीबीआई निदेशक के पद पर नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश पर की जाएगी जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता या कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की स्थिति में सदन में सबसे बड़े दल के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश होंगे।

इसमें बताया गया कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति होने तक इस पद की जिम्मेदारियों को देखने के लिए प्रवीण सिन्हा को निर्देशित किया गया है जो सीबीआई में अतिरिक्त निदेशक दर्जे के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं।

शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए 13 मई की तारीख तय की है।

शीर्ष अदालत ने पांच अप्रैल को केंद्र सरकार से कहा था कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक दो मई से पहले बुलाने पर विचार किया जाए क्योंकि इस पद के लिए ‘प्रभारी संबंधी व्यवस्थाएं’ नहीं चलती रह सकतीं।

भाषा वैभव नेत्रपाल

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