हिमाचल प्रदेश की एक अदालत द्वारा करीब एक दशक पुराने मामले में हरियाणा के कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी को दोषी करार दिये जाने के बाद वह विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो गये हैं. हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने शनिवार को यह जानकारी दी.

गुप्ता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सोलन जिला के नालागढ़ में स्थित एक अदालत ने चौधरी को हमला, दंगा करने और अन्य दंडनीय अपराधों के तहत तीन साल की कैद की सजा सुनाई है. उन्हें 14 जनवरी को इस मामले में दोषी ठहराया गया था. कालका विधायक अपनी दोषसिद्धि के दिन से विधानसभा की सदस्य के लिए अयोग्य हो गये हैं.

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गुप्ता ने संवाददाताओं से कहा कि दो साल से अधिक की कैद की सजा का प्रावधान करने वाली दोषसिद्धि के बाद उनके अयोग्य हो जाने पर राज्य विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की, जिसमें कालका सीट को 14 जनवरी से रिक्त घोषित किया गया है.

गुप्ता ने कहा, ‘‘आज, हमने अधिसूचना जारी की और कालका सीट 14 जनवरी से रिक्त घोषित कर दी गई है. ’’

गौरतलब है कि दो साल से अधिक की कैद की सजा का प्रावधान करने वाले किसी भी अपराध में दोषी करार दिये जाने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम,1951 की धारा आठ के तहत मौजूदा विधायक स्वत: ही अयोग्य हो जाते हैं.

गुप्ता ने एक सवाल के जवाब में कहा कि चौधरी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं और (उच्चतर) अदालत का जो कुछ फैसला होगा, ‘‘हम उसके मुताबिक कदम उठाएंगे. ’’

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