कोरोना महामारी से विश्व भर में सभी देश जूझ रहे है. कोरोना महामारी से भारत सहित कई देशों की आर्थिक हालत से लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था तक चरमरा गई है. सभी प्रकार के वायरस अपने आप को बदलते रहते हैं, कोरोना भी कुछ इसी प्रकार बार-बार म्यूटेशन के जरिए हमला बोल रहा है. अब तक कोरोना के तमाम नए वेरिएंट मिल चुके हैं. मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना का एक और नया वेरिएंट दस्तक दे चुका है. इस का नाम लांब्‍डा वेरिएंट (Lambda Variant) रखा गया है. 

अब तक दुनिया के 30 से भी ज्यादा देशों में इस नए वेरिएंट ने अपने पैर पसार लिए हैं. बीते कुछ सप्ताह से तो इसके मामले और भी तेजी से बढ़ रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार ये वेरिएंट भारत में दूसरी लहर के समय तबाही मचाने वाले डेल्टा वेरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसको 'वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' बताया है. 

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कहां से आया ये नया वेरिएंट

कोरोना के नए-नए वेरिएंट इस महामारी को और भी ज्यादा जानलेवा बना रहे हैं. मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को ट्वीट के जरिए बताया, "कोरोना का लांब्‍डा वेरिएंट सबसे पहले पेरू में मिला था, जहां इस वक्त कोरोना महामारी के चलते मृत्यु दर दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले सबसे अधिक है."

वहीं अगर एक ऑस्ट्रेलियाई न्यूज़ पोर्टल की बात मानें तो उनके मुताबिक कोरोना का लांब्‍डा वेरिएंट यूनाइटेड किंगडम में भी सामने आया है. विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना का ये वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार डेल्टा वेरिएंट से भी कहीं ज्यादा जानलेवा हो सकता है.

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पेरू में मचा चुका है तबाही 

इस नए वेरिएंट से पेरू में हालात काफी गंभीर हैं. पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (पीएएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेरू में मई और जून के महीने में दर्ज किए गए कोरोना के 82 प्रतिशत केस लांब्‍डा वेरिएंट के कारण से ही सामने आए थे. इसके साथ ही दक्षिण अमेरिकी देश चिली में भी हालात कुछ ज्यादा अलग नहीं हैं. यहां मई और जून के महीने में 31 प्रतिशत से ज्यादा मामले इस वेरिएंट की वजह से ही मिले थे. 

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एंटीबॉडी बनने से रोकता है लांब्‍डा वेरिएंट?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने लांब्‍डा वेरिएंट को ' वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' बताया है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लांब्‍डा वेरिएंट काफी तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है साथ ही संक्रमित व्यक्ति के अंदर एंटीबॉडी बनने से भी रोकता है. इसके साथ ही पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) के अनुसार, इंग्लैंड में अब तक इस नए वेरिएंट के छह केस सामने आए हैं, वो भी विदेशों में यात्रा करने की वजह से, जिसके बाद यूके के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि यह वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है या कोरोना वैक्सीन के असर को कम कर सकता है. इसके साथ ही स्ट्रेन को समझने के लिए लैब में परीक्षण किया जा रहा है.

राहत की बात यह है कि फिलहाल लांब्‍डा वेरिएंट का एक भी केस भारत में सामने नहीं आया है. 

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