नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए “राष्ट्रीय जरूरत” के मद्देनजर वेदांता को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में उसके बंद ऑक्सीजन संयंत्र को चलाने की अनुमति दे दी है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने तमिलनाडु सरकार को संयंत्र के संचालन पर नजर रखने के लिये एक समिति गठित करने का निर्देश दिया।

कंपनी के तांबा गलाने संबंधी काम के कारण पर्यावरण संबंधी चिताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर मई 2018 में हुई पुलिस गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद संयंत्र को बंद कर दिया गया था।

बुधवार को अपलोड हुई मंगलवार को पारित आदेश में पीठ ने कहा, “महामारी के दौरान राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिये हम ऑक्सीजन संयंत्र के संचालन के लिये प्रार्थना (वेदांता की) को मंजूरी देने के इच्छुक हैं।”

आदेश में कहा गया, “इससे आवेदक के पक्ष में कोई न्यायसंगतता नहीं बनती कि वह भविष्य में पूरे संयंत्र के संचालन की मांग या उम्मीद करे। मौजूदा आदेश सिर्फ इस समय चिकित्सीय स्तर की ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत के मद्देनजर पारित किया जा रहा है।”

तमिलनाडु की तरफ से दायर ज्ञापन को स्वीकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने प्रदेश सरकार को एक समिति बनाने को कहा है जो संयंत्र के संचालन पर नजर रखेगी। इस समिति में तूतीकोरिन के कलेक्टर अध्यक्ष होंगे। उनके अलावा समिति में तूतीकोरिन के पुलिस अधीक्षक, तूतीकोरिन के उपजिलाधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जिला पर्यावरण अभियंता, ऑक्सीजन संयंत्र के बारे में तकनीकी जानकारी रखने वाला एक सरकारी अधिकारी और दो पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ होंगे।

शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि संयंत्र का संचालन सिर्फ चिकित्सीय ऑक्सीजन बनाने के उद्देश्य से होगा किसी और उद्देश्य के लिये नहीं।

पीठ ने कहा, “मौजूदा आदेश के तहत याचिकाकर्ता तांबा गलाने के संयंत्र या उसकी किसी उपयुक्त सुविधाओं में प्रवेश के लिये अधिकृत नहीं होगा, रखरखाव के लिये भी नहीं। आवेदक को पूर्व में इस अदालत द्वारा दिये गए सभी निर्देशों का पालन करना होगा और सिवाय ऑक्सीजन संयंत्र के संचालन के लिये दिये गए इस आदेश के तहत किये गए फेरबदल को छोड़कर।”

भाषा

प्रशांत माधव

माधव