नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ) ने 28 कंपनियों को अपनी विसंक्रमण (डिसइंफेक्शन)प्रणाली की तकनीक हस्तांतरित की है जिसका उपयोग सभागारों, बड़े सम्मेलन कक्षों, कक्षाओं, मॉल में किया जा सकता है। इस प्रणाली के इस्तेमाल से वर्तमान महामारी के समय में इनडोर गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकेगा।

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने कहा कि प्रौद्योगिकी का विकास एयरोसोल में मौजूद एसएआरएस सीओवी-2 वायरस को निष्क्रिय करने की आवश्यकताओं के अनुसार आवश्यक वेंटिलेशन उपायों, आवश्यक सुरक्षा एवं उपयोगकर्ता दिशानिर्देशों और परीक्षण किए गए जैव-सुरक्षा मानकों के साथ किया गया है।

सीएसआईओ सीएसआईआर का एक घटक है।

उसने अपने दो संस्थानों - सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) और इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (आईएमटीईसीएच) द्वारा सितंबर 2020 में किए गए एक शोध का उल्लेख किया जिसमें प्रयोगात्मक रूप से प्रदर्शित किया था कि एसएआरएस सीओवी-2 वायरस के कण किसी संक्रमित व्यक्ति के किसी कमरे से बाहर निकलने के दो घंटे बाद भी हवा में पाए गए थे जिससे इस वायरस के हवा से संचरण के सबूत और पुख्ता हुए थे।

सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति की छींक से निकलने वाली छोटी बूंदें दो मीटर के क्षेत्र में गिर सकती हैं और इससे निकलने वाली फुहार (एयरोसोल) दस मीटर दूर तक जा सकती है। उसने कहा कि वायु संचार व्यवस्था उचित होने से संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय ने यूवी-सी विसंक्रमण प्रणाली 254 एनएम यूवी प्रकाश का उपयोग करके उचित खुराक के साथ 99 प्रतिशत से अधिक वायरस, बैक्टीरिया, कवक और अन्य जैव-एरोसोल आदि को निष्क्रिय कर देती है। इसमें कहा गया है कि यूवी-सी का उपयोग महामारी की मौजूदा लहर के दौरान देखे जा रहे फंगल संक्रमण को कम करने में भी मदद कर सकता है।