.. राजीव शर्मा ..

हर भाषा के कुछ नियम होते हैं। अगर उनका पालन नहीं किया जाए तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है। जैसे- पति और पत्ती। पहले शब्द का अर्थ है, किसी महिला का विवाहित जीवनसाथी और दूसरे शब्द का अर्थ है, किसी पेड़-पौधे का एक भाग। इसे सामान्य भाषा में पत्ती या पत्ता (ताशवाला नहीं!) भी कहते हैं।

मैं हिंदी के कुछ शब्दों में अक्सर ग़लती करता था। जैसे- 'पति-पत्नी' में कभी पती लिख देता तो कभी पत्नि। मेरे इस भ्रम को एक शिक्षिका ने दूर किया जिन्होंने पांचवीं कक्षा में हमें हिंदी पढ़ाई थी। उनका तरीका बहुत रोचक था। हालांकि वे हमें बहुत कम समय ही पढ़ा सकीं। उसके बाद किसी और स्कूल में पढ़ाने लगीं।

उन्होंने बताया, देखो! पति न घर में खुलकर बोल सकता है, न दफ्तर में खुलकर बोल सकता है। घर में पत्नी का हुक्म चलता है और दफ्तर में बॉस डांटता है। इसलिए पति के 'त' पर हमेशा छोटी 'इ' (ति) की मात्रा आएगी।

चूंकि ज़माना तेज़ी से बदल रहा है। महिलाएं हर जगह छा रही हैं। घर में उनका राज चलता है।  माता-पिता में भी नारी का उल्लेख पहले आता है, तो याद रखो, पत्नी के 'न' पर हमेशा बड़ी 'ई' (नी) की मात्रा आएगी।

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यह भी याद रखो कि दुनिया में शिक्षक ही ऐसा व्यक्ति है जिसके पढ़ाए हुए बच्चे उससे भी आगे निकल जाते हैं। इससे उसे प्रसन्नता व गर्व की अनुभूति होती है। वह सदैव विनम्र बना रहता है। इसलिए गुरु के 'ग' और 'र' पर हमेशा छोटे 'उ' की मात्रा लगाओ।  

मैं उनका यह सबक कभी नहीं भूला। आज (01.09.2021) को प्रसिद्ध समाचारपत्र दैनिक भास्कर की साप्ताहिक मैगज़ीन 'मधुरिमा' पढ़ी तो हैरान रह गया। इसके प्रथम पृष्ठ पर ही कम से कम दो बार 'गुरु' शब्द का उल्लेख किया गया है और दोनों ही ग़लत हैं।  

इसके आमुख में लिखा है- 'समय गुरू बना, दुनिया शिष्य'। इसी तरह 'बोधकथा' का शीर्षक 'गुरू की भेंट' है। यहां सही शब्द 'गुरु' होना चाहिए।  

मैंने कई बार मधुरिमा पढ़ी है। यह बहुत अच्छी मैगज़ीन है। पहली बार इसके प्रथम पृष्ठ पर इतनी बड़ी ग़लती देखकर मुझे हैरानी हुई तो इस पर लिखना ज़रूरी समझा। आशा करता हूं कि इतने प्रसिद्ध प्रकाशक भविष्य में अवश्य ध्यान रखेंगे क्योंकि भाषा के निर्माण में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोग इन्हें पढ़कर ही सीखते हैं।  

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यह भी आश्चर्यजनक है कि कोरोनाकाल में समाचारपत्रों में ऐसी ग़लतियां बहुत बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले राजस्थान पत्रिका ने भारी वर्षा से हुए नुकसान को 'जलजला' लिख दिया था, जबकि 'ज़लज़ला' का अर्थ भूकंप होता है। उसका जल से उतना ही संबंध है जितना कि नासा का दही-बड़े बनाने से!

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