दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मामलों से निपटने के लिए जांच में तेजी लाने और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित करे. अदालत ने कहा कि लोगों में मन में वायरस के बारे में काफी डर समाया हुआ है.

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि जांच के नतीजे बताने में अभी 48 घंटे या उससे ज्यादा वक्त लगता है, जबकि यह 24 घंटे के अंदर होना चाहिए.

अदालत ने कहा कि जांच प्रयोगशालाएं नमूना लेते समय ही लोगों के नंबर ले लें और कोविड-19 की जांच के नतीजे उनके मोबाइल फोन पर दिए जा सकते हैं तथा वेबसाइट पर इसे बाद में डाला जा सकता है.

अदालत का निर्देश और सुझाव, राष्ट्रीय राजधानी में जांच की संख्या बढ़ाने और तेजी से जांच के नतीजे देने को लेकर दायर की गई अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है.

अदालत ने सरकार से कहा कि वर्तमान में हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है. ‘‘यह केवल संक्रमण के कारण नहीं है, बल्कि इस कारण है कि आप नहीं जानते हैं कि वायरस का वाहक कौन हैं. ये दोनों चीजों लोगों में मन में समाई हुई हैं. हल्के संक्रमण वाले मरीज शीघ्रता से स्वस्थ हो सकते हैं , लेकिन इस समय डर की भावना बहुत ज्यादा है.’’

अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि घर पर पृथक रह रहे लोग घरों के अंदर ही रहें और बाहर नहीं जाएं तथा अन्य को संक्रमित नहीं करें. पीठ ने कहा, ‘‘आप कैसे निगरानी करते हैं , यह बहुत महत्वपूर्ण है.’’ पीठ ने पूछा, ‘‘आप किस तरह से निगरानी कर रहे हैं.’’

अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर करने के बाद कहा कि इसमें आईसीयू बेड में वृद्धि आदि के बारे में विस्तृत जानकारी का अभाव है. साथ ही, इन पहलुओं पर उसने अगली स्थिति रिपोर्ट में सूचना देने का निर्देश दिया, जो 14 दिसंबर तक दाखिल की जानी है.