(मुहम्मद मजहर सलीम)

लखनऊ, 23 मई (भाषा) उद्योग मंडल 'एसोचैम' ने सरकार से कोविड—19 महामारी के मद्देनजर लागू पाबंदियों से सबसे ज्यादा प्रभावित कुटीर, लघु एवं मंझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिये सुगठित राहत पैकेज की मांग करते हुए कहा है कि छोटे और रेहड़ी, पटरी दुकानदारों को दिये जाने वाले वित्तीय लाभ और रियायतों का दायरा बढ़ाया जाना चाहिये।

एसोचैम के अध्यक्ष और 'ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन आफ इण्डिया लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक विनीत अग्रवाल ने रविवार को 'भाषा' से विशेष बातचीत में कहा कि कोविड—19 महामारी के कारण उद्योगों, खासकर एमएसएमई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ऐसे में एमएसएमई को राहत पैकेज दिया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा ‘‘एमएसएमई को राहत पैकेज देते हुये इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि इसका फायदा एमएसएमई के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचे। एसोचैम का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को एमएसएमई की मदद के लिए एक साथ आगे आना चाहिए ताकि उद्योगों के इस समूह को केन्द्रित, लक्षित और सही तरीके की राहत मिल सके।''

अग्रवाल ने कहा ''अगर सरकार बैंकों को निर्देश देकर एमएसएमई की कार्यशील पूंजी की सीमा को बिना जमानत के 20 प्रतिशत तक बढ़वा दे, एमएसएमई के एनपीए का पुनर्वर्गीकरण करे और छोटे तथा पटरी दुकानदारों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभों का दायरा बढ़ाकर उसे अधिक तर्कसंगत तथा न्याय संगत बनाये तो इससे बहुत राहत मिलेगी।''

एसोचैम अध्यक्ष ने कहा ''जैसा कि हमने पहली लहर में भी देखा था कि बड़ी कंपनियां लॉकडाउन के झटके से अपेक्षाकृत तेजी से उबर गयी थीं लेकिन एमएसएमई क्षेत्र को बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था। उनके उत्पादों की न सिर्फ मांग घटी बल्कि उन्हें समय से भुगतान भी नहीं हो पाया था। सेवा क्षेत्र से जुड़ी एमएसएमई जैसे कि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्रों पर गौर करें तो उनके सामने चुनौतियां अपेक्षाकृत ज्यादा बड़ी हो गई हैं। आने वाले वक्त में उन एमएसएमई के सामने और भी दुश्वारियां आएंगी जो अभी पहली लहर की मार से ही नहीं उबर पायी हैं।''

अग्रवाल ने बताया कि पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर के साथ एसोचैम तथा अन्य उद्योग मंडलों की बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने खास तौर पर एमएसएमई को लेकर कुछ सुझाव दिए थे। पिछले साल महामारी के दौरान रिजर्व बैंक ने स्थितियों को पहले से ही भांपकर कुछ कदम उठाए थे जिसकी वजह से बहुत बड़े पैमाने पर कारोबार और उद्योगों को बचाने में मदद मिली थी। यह कवायद आगे भी जारी रहनी चाहिए।

अग्रवाल ने कहा कि कोविड—19 महामारी की दूसरी लहर के बाद पैदा हुए हालात पहली लहर के मुकाबले कुछ अलग हैं। पिछली बार लॉकडाउन में अचानक सब कुछ बंद कर दिया गया था। मगर इस बार 'माइक्रो कंटेनमेंट' रणनीति अपनायी गयी है। इस दफा धीरे-धीरे करके हर जगह थोड़ा-थोड़ा लॉकडाउन शुरू किया गया है जिससे और भी ज्यादा अनिश्चितता पैदा हुई है। मगर सकारात्मक पहलू यह है कि इस बार सब कुछ एक साथ बंद नहीं है, इसलिये आपूर्ति श्रंखला पर उतना बुरा असर नहीं पड़ा है।

कोविड-19 महामारी की संभावित तीसरी की लहर को लेकर जरूरी तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर विनीत ने कहा कि प्रतिव्यक्ति के हिसाब से देखें तो भारत में स्वास्थ्य सम्बन्धी मूलभूत ढांचे की स्थिति अच्छी नहीं है। इस पर निवेश काफी बढ़ाये जाने की जरूरत है।

भाषा सलीम नेत्रपाल महाबीर

महाबीर