नयी दिल्ली 23 मई (भाषा) उद्योग निकाय इंडियन पाइप मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) ने स्टील की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि के बीच सरकार से पाइप के विनिर्माण में काम आने वाले इस कच्चे माल की कीमतों को विनियमित करने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

आईपीएमए ने केंद्रीय स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिख कर इस्पात के निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की भी मांग की है ताकि घरेलू आपूर्ति बढ़े और कीमतें कुछ शांत हों।

आईपीएमए ने 20 मई को लिखे पत्र में कहा, ‘‘पाइप निर्माता और विभिन्न उत्पादों में इस्पात का उपयोग करने वाली सूक्ष्म, लघु और मध्यम औद्योगिक इकाइयां स्टील के बढ़ते दाम समेत स्टील की कमी से कई मुश्किलों का सामना कर रही हैं। हमने स्टील मंत्री कार्यालय से संपर्क किया था और अब आपसे स्टील की निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने और कीमतों को विनियमित करने के लिये सरकार के हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं।’’

आईपीएमए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यालय (पीएमओ), वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, वाणिज्य सचिव अनूप वधावन, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के सचिव गुरुप्रसाद महापात्र और इस्पात सचिव प्रदीप कुमार त्रिपाठी को पत्र की प्रतियां भेजी है ताकि उन्हें भी इस मसले से अवगत कराया जा सके।

उसने कहा, ‘‘स्टील के दाम पिछले दस महीने के दौरान 60 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। भविष्य में स्टील का दाम चार हजार रुपये टन तक पहुंचने का अनुमान है। कीमतों में वृद्धि से छोटे उद्योगों के लिए व्यापार करना लगभग असंभव हो गया है क्योंकि वे कच्चे माल के लिए एकीकृत स्टील मिलों पर निर्भर हैं।’’

उसने दावा किया कि कई छोटे उद्योग स्टील के दामों में वृद्धि के कारण बंद हो गए हैं या बंद होने की कगार पर है।

आईपीएमए के एक प्रवक्ता ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘पिछले सात-आठ महीनों में स्टील के दाम तेजी से बढ़े हैं। वही तेल और गैस पाइप ग्रेड के इस्पात के दाम तो 100 से 125 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।’’

गौरतलब है कि घरेलू स्तर पर स्टील के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए है। मई 2021 में हॉट रोल्ड स्टील कॉईल का भाव चार हजार रुपये बढ कर 67 हजार रुपये प्रति टन तथा कोल्ड रोल्ड स्टील कॉईल के दाम 4500 हजार रूपये बढ कर 80 हजार रुपये टन के स्तर पर पहुंच गया है।

अमेरिका में स्टील की कीमतें 1500 डॉलर प्रति टन और यूरोप में 1000 यूरो प्रति टन पर है।

भाषा जतिन मनोहर

मनोहर