मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) के मौके पर आज (11 फरवरी) को वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगा रहे हैं. मौनी अमावस्या पर एक ऐतिहासिक स्नान की परंपरा चली आ रही है. इस दिन पितृ पूजन का खास महत्व होता है. मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद दान करने की परंपरा को शुभ माना जाता है. इस मौके पर तिल और तिल से बनी चीजों को दान किया जाता है.

मौनी अमावस्या पर मौन रह कर सारे काम किए जाने की परंपरा भी है. माना जाता है कि इस तरह के कुछ खास उपायों से पितृदोष भी शांत होता है.

ऐसी मान्यता है कि पितृ दोष से मुक्ति के लिए इस दिन पितरों को ध्यान करते हुए सूर्य देवता को जल चढ़ाना चाहिए. साथ ही लाल फूल और काले तिल चढ़ाना चाहिए.

मौनी अमावस्या के दिन नदी में स्नान करने की भी परंपरा भी है. देश के अलग-अलग हिस्सों में नदी किनारे लोगों की भीड़ देखी जा रही है. नदी में स्नान के लिए कई स्थानों पर एहतियात के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी लगाई गई है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज में रात से ही श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के लिए पहुंचे. प्रयाग राज में पुलिस ने बताया, 12 बजे रात से ही बड़ी संख्या में लोग स्नान करके जा रहे हैं. मेले में फायर ब्रिगेड की 13 टीमें और 5000 से अधिक जवान तैनात हैं

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