गैंगस्टर विकास दुबे का जिस तरह से एनकाउंटर हुआ है उस पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने विकास दुबे के एनकाउंटर पर कहा है कि, उन्हें पहले से ही इसकी आशंका थी. क्योंकि पहले भी इस मामले में जो तीन एनकाउंटर हुए वह सभी एक जैसे थे.

'विकास दुबे को निजी सिक्योरिटी एजेंसी ने पकड़ा था'

दिग्विजय सिंह ने कहा, सवाल इस बात का है कि जिस प्रकार से वो सरेंडर हुआ या गिरफ्तार हुआ. मध्य प्रदेश पुलिस उसका श्रेय लेना चाहती है. लेकिन ये साफ है कि निजी सिक्योरिटी एजेंसी के लोगों ने उसको पकड़ा था. मध्य प्रदेश पुलिस को इसकी जानकारी भी नहीं थी.

'मुझे पहले से थी विकास दुबे के एनकाउंटर की आशंका'

दिग्विजय सिंह ने आगे कहा है कि, 'पिछले चार दिन में यूपी पुलिस ने 3 एनकाउंटर किए हैं, तीनों एनकाउंटर का घटनाक्रम एक जैसा है. मुझे तो पहले इसकी आशंका थी क्योंकि इसके पास जो राज थे कि कौन सी राजनीतिक हस्तियां इससे जुड़ी थी, कौन से पुलिस और शासकीय अधिकारी इससे मिले हुए थे. विकास से इन सभी चीजों का खुलासा होता.'

बता दें कि, प्रियंका गांधी ने भी कुछ इसी तरह का सवाल किया है. उन्होंने ने भी कहा है कि, 'अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?'

मतलब साफ है कि, विपक्षी उस राज पर सवाल खड़े कर रहे हैं जो विकास दुबे खुलासा करने वाला था. अगर उससे पूछताछ होती तो उससे कई चीजों का पर्दाफाश हो सकता था. लेकिन अब उसकी मौत के साथ ही ये सभी राज दफ्न हो गए.

वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, कानून ने अपना काम किया है. अफसोस और मातम की बात उन लोगों के लिए होगी जो कल पकड़ लिया था तो कह रहे थे कि जिंदा क्यों पकड़ लिया? आज मर गया तो कह रहे हैं कि मर कैसे गया कई राज दफन हो गए. मध्य प्रदेश की पुलिस ने अपना काम किया, गिरफ्तार करके UP पुलिस के हवाले कर दिया.

विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर यूपी के एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया है कि, विकास दुबे जब कानपुर वापस लाया जा रहा था, तब गाड़ी पलट गई उसके बाद उसने पुलिस का हथियार छीनने की कोशिश की और भागा. पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में फायरिंग की, वो घायल हुआ और अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित किया गया.

बता दें, विकास दुबे पर पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम रखा था. कानपुर एनकाउंटर की घटना के बाद वह फरार था लेकिन उज्जैन में वह आसानी से पकड़ा गया. विकास दुबे कई घटनाओं का अहम राजदार था. उस पर 60 से अधिक हत्या, अपहरण जैसे मामले दर्ज थे.