गणेश चतुर्थी भारत में सबसे बड़े त्योहारों में से एक है जिसे बहुत भक्ति, उत्साह और तपस्या के साथ मनाया जाता है. भारत में सबसे बड़े और सबसे शुभ त्योहारों में से एक, गणेश चतुर्थी इस साल शुक्रवार, 10 सितंबर को मनाया जाएगा. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह भाद्रपद के महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. जब गणेश चतुर्थी की बात आती है, तो बड़े बुजुर्ग लोग कहते हैं कि हमें इस विशेष दिन पर आकाश में चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं क्यों? इसके पीछे की एक दिलचस्प कहानी है.

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जब गणेशजी को गज मुख लगाया गया. उन्होंने पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा की, तो प्रथम पुज्य कहलाए. सभी देवताओं ने उनकी वंदना की, लेकिन तब चंद्रमा उन्हे देख मंद-मंद मुस्कुराते रहे. दरअसल, चंद्रमा को तब अपने सौंदर्य पर घमंड था. बाकी देवताओं की तरह चंद्रमा ने गणेश जी की वंदना नहीं की तो गणेश जी को गुस्सा आ गया. गणेश जी ने गुस्से में आकर चंद्रमा को श्राप दे दिया कि आज से तुम काले हो जाओगे. चंद्रमा को समझ आ गया कि उनसे बड़ी भूल हो गई है. चंद्रमा ने माफी मांगी तो गणेशजी ने कहा कि जैसे-जैसे सूर्य की किरणें उन पर पड़ेगी वैसे ही उनकी चमक लौट आएगी. लेकिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी का यह दिन आपको दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा. जो कोई व्यक्ति इस दिन चंद्रमा का दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा.

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उस दिन से, 'भाद्रपद चतुर्थी' को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. जो कोई भी गलती से भाद्रपद चतुर्थी पर चंद्रमा को देख लेता है तो वह इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए पवित्र अनुष्ठानों का पालन कर सकता है और गणेश चतुर्थी की कथा को सुन/पढ़ सकता है.

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नोटः ये लेख मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं. ओपोई इस बारे में किसी भी बातों की पुष्टि नहीं करता है.