पॉर्न वेबसाइट्स और इंटरनेट कनेक्शन के चलते युवाओं की पॉर्न वीडियोज पर पहुंच काफी आसान हो गई है. आज कल युवा घरवालों से छुपकर पॉर्न वीडियो देखते हैं इससे उन्हें कई तरह के नुकसान हो रहे हैं. युवाओं को मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचता है. इससे उनके दूसरों के साथ रिश्तों में भी तनाव आता है. 

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कई स्टडीज में यह बात साबित हुई है कि ज्यादा पॉर्न वीडियो देखने से युवा इरेक्टाइल डिसफंक्शन का भी शिकार हो रहे हैं. ऐसे भी कई लोग है जिन्हें इस बारे में जरा भी खबर नहीं है. कई स्टडी में यह बताया गया है कि पॉर्न देखने वाले पुरुषों की सेक्स लाइफ ज्यादा अच्छी नहीं रहती है. इतना ही नहीं, पोर्नोग्राफी कंटेंट पुरुषों की सेक्स लाइफ के लिए एक अभिशाप की तरह है. 

कई स्टडी में तो यहां तक कहा गया है कि जिन्हें पॉर्न का एडिक्शन लग जाता है वह अपनी लाइफ में सफल नहीं हो पाते. वह खाली समय में शर्मिंदगी के चलते अपना ज्यादातर समय पॉर्न वीडियो देखने में ही गुजार देते हैं. इस तरह वह लोग खुलकर बात भी नहीं कर पाते. 

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वह लोग जो पूरी तरह से पॉर्न वीडियो पर निर्भर होते हैं उनकी स्थिति बद से बदतर हो सकती है. यहां तक की कई ऐसे मामले भी सामने आए है कि कुछ युवा पॉर्न वीडियो से प्रेरित होकर यौन हिंसा पर उतारू हो जाते हैं. उन्हें यह भ्रम हो जाता है कि पॉर्न वीडियों में जो वह देख रहे हैं वह रियलिटी है.  

हमारा नर्वस सिस्टम डोपामाइन नाम का एक न्यूरोट्रांसमीटर प्रोड्यूस करता है. ये हमारे दिमाग के किसी काम के लिए प्रेरणा देता है. वहीं पॉर्न कंटेंट डोपामाइन रिलीज करता है जिससे हमारे अंदर निराशा भर जाती है. 

काफी सारे ऐसे लोग हैं जो पोर्नोग्राफी की लत से जूझ रहे हैं. वह चाहते हुए भी इससे बाहर नहीं निकल पा रहे. ऐसे लोगों को ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात करनी चाहिए, लाइफ में बिजी रहना चाहिए ताकि पॉर्न देखने का समय ही ना मिले. 

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