कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से सैकड़ों लोगों की मौत हुई. देश के प्रत्येक राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत देखी गई और सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन की जरूरत को लेकर मुहीम चालई जा रही थी. वहीं, ऑक्सीजन के बिना तड़पते लोगों और उनके दम तोड़ने के बाद उजड़ते परिवारों की चीख लोगों को परेशान कर रही थी. ऑक्सीजन का मामला कोर्ट तक भी पहुंचा और किल्लत को दूर करने के लिए डेड लाइन आदेश भी जारी हुए. लेकिन अब विडंबना यह है कि ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले लोग काल्पनिक हो गए हैं. क्योंकि सरकार ने कहा है कि ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौतें नहीं हुई हैं.

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अब सवाल ये है कि वह कौन लोग थे जो ऑक्सीजन के बिना अस्पताल और सड़क पर तड़प रहे थे. वह कौन लोग थे जो इमरजेंसी ऑक्सीजन की मांग कर रहे थे. सुनकर अजीब लग रहा होगा. लेकिन केंद्र सरकार की कागजी जवाब से तो सभी को अजीब लगा की कोरोना महामारी के दौर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई.

ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले लोगों के दर्जनों किस्से होंगे लेकिन ये सरकार की रिपोर्ट में दर्ज नहीं हैं. राजधानी दिल्ली से लेकर यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा सभी जगहों पर ऑक्सीजन की कमी से लोग दम तोड़ते दिखे. मीडिया चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरें दिखाई दी थी.

हालांकि, इन तस्वीरों से अलग मोदी सरकार ने संसद में इस पर बयान दिया. राज्यसभा में सरकार ने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत हुई ऐसी राज्यों से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली.

संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार से कोरोना को लेकर कई सवाल पूछे, इसमें कोरोना से मरने वालों के आंकड़ों को छुपाने के भी आरोप लगा गए. वहीं ऑक्सीजन की कमी पर भी सवाल किए गए. इसी क्रम में केसी वेणुगोपाल ने ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों और ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर सवाल पूछा था.

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इसके लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार ने कहा, ''स्वास्थ्य राज्य का मसला है. मौत की रिपोर्टिंग को लेकर केंद्र ने राज्य सरकारों के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. इसी के अनुसार राज्य केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को केस और मौतों के बारे में जानकारी देते थे. हालांकि, किसी भी केंद्र शासित प्रदेश या राज्य ने ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.''

ऐसे ही एक दूसरे सवाल का जवाब देते हुए भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, ''आंकड़े छिपाने का कोई कारण ही नहीं है. बताना चाहिए, लेकिन आप किसके ऊपर आरोप लगा रहे हैं. रजिस्ट्रेशन कौन करता है? आंकड़े कौन तय करता है? राज्य करते हैं. मोदी जी ने तो ये भी कहा कि बैकलॉग है तो वो भी डाल दीजिए.''

मांडविया ने कहा, ''फिर भी कुछ सम्मानीय सदस्य कह रहे हैं कि भारत सरकार आंकड़ा छिपा रही है. राज्य सरकारें जो आंकड़ा भेजती हैं, भारत सरकार उसे जोड़कर पब्लिश करती है. भारत सरकार का पब्लिश करने के अलावा कोई और काम नहीं होता है.''

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सरकार के इस जवाब पर अब देश के लोग अवाक हैं. आलोचना भी कर रहे हैं. उन दिनों को याद कर रहे हैं कि उस भयावह दिन को कोई भूल नहीं सकता. भूल गई तो केवल सरकार.