'सपने वो नहीं होते, जो आपको रात में सोचे समय नींद में आए बल्कि सपने वे होते हैं, जो रात में सोने ही न दें'. ऐसी महान सोच रखने वाले 'मिसाइलमैन' पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को भारतीय मिसाइल प्रोग्राम का जनक कहा जाता है. वे इतने लोकप्रिय रहे कि उन्हें आज भी जनता का राष्ट्रपति कहा जाता है.

आज यानी 27 जुलाई को उनकी पुण्यतिथि है, इस अवसर पर जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें....
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एपीजे अब्दुल का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था. उनका पूरा नाम डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था.
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 कलाम को बचपन में पढ़ाई के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उनके घर में बिजली नहीं थी. वे तेल का दीया जलाकर पढ़ाई किया करते थे.
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अब्दुल कलाम को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास बचपन से ही गया था. वह सड़क पर अखबार बेचा करते थे.
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कलाम ने इसरो, डीआरडीओ में अहम पदों पर काम किया. देश को परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता देने का श्रेय उन्हें ही जाता है.
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वे ऐसे राष्ट्रपति थे, जिन्हें लगभग सभी पार्टियों से समर्थन प्राप्त था.
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कलाम को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से सम्मानित किया गया था.
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संयुक्त राष्ट्र ने कलाम के 79 वें जन्मदिन को विश्व छात्र दिवस के रूप में मान्यता दी थी.
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स्विट्जरलैंड ने 2005 में कलाम द्वारा देश की यात्रा को सम्मान के तौर पर याद करने के लिए 26 मई को "विज्ञान दिवस" ​​घोषित किया.
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कलाम भारतीय वायुसेना के लिए एक फाइटर पायलट बनना चाहते थे. वह केवल एक रैंक से चूक गए. वह सूची में नौवें स्थान पर थे और केवल आठ ही पद थे.
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उन्हें 2003 और 2006 में दो बार एमटीवी यूथ आइकन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.