अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर दशहरा के साथ अपराजिता व शमी के पूजन की मान्यता हैं. पंचागीय गणना के अनुसार अश्विन मास की शुक्लपक्ष की दशमी तिथि पर अपराजिता एवं शमी के वृक्ष के पूजन की भी मान्यता है. पं अमर डब्बावाला के अनुसार यह पर्व भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है. इसी दिन लोग शस्त्र पूजा भी करते हैं जिससे कि दुश्मनों पर विजय प्राप्त की जा सके. इसके अलावा भी कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें लोग संपन्नता और ऐश्वैर्य पान के लिए अपनाते हैं.

आप भी कर सकते है ये 5 उपाय

1. दशहरे के दिन दोपहर को घर के ईशान कोने में चंदन, कुमकुम और पुष्प से अष्टदल कमल की आकृति बनाएं और देवी जया व वजिया का स्मरण कर उनका पूजन करें. इसके बाद शमी वृक्ष की पूजाकर वृक्ष के पास की थोड़ी मिट्टी लेकर अपने घर में रखें. ऐसा करने से रुके हुए काम बनते हैं.

2. अगर आप कानूनी दांव पेंच से परेशान हैं या मुकदमों में फंसे हैं तो दशहरे को शमी के पेड़ की पूजा करें और शाम को उसके नीचे दीपक जलाएं. ऐसा करने से मुकदमों में विजय मिलती है और धन की प्राप्ति होती है.

3. भगवान हनुमान संकटमोचन भी कहा जाता है. यदि आपके सामने किसी प्रकार का संकट है तो दशहरे के दिन सुबह गुड़ चने और शाम को लड्डु का भोग लगाकर प्रार्थना करें इससे हनुमान जी आपकी की कृपा बनी रहेगी और वे आपकी रक्षा करेंगे.

4. किसी भी क्षेत्र में विजय पाने के लिए दशहरे के दिन देवी पूजन करें और उन्हें 10 फल चढ़ाकर गरीबों में बांटें. देवी मां को फल चढ़ाते वक्त 'ॐ विजयायै नम:' मंत्र का जाप करें. यह उपाय आप दशहरे के दिन दोपहर में कर सकते हैं.

5. किसी को अपने बुरे कार्यों के लिए यदि यमलोक का भय सता रहा हो तो दशहरे के दिन मां काली का ध्यान करते हुए उनसे क्षमा मांगें और काला तिल चढ़ाएं.