आज यानी 21 जुलाई को बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है. बकरीद को ईद उल-अज़हा के नाम से भी जाना जाता है. बकरीद के त्योहार को कुर्बानी के तौर पर मनाया जाता है. जिसमें बकरे और भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है. 

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से बकरी के खरीद को लेकर एक बेहद अनोखी खबर सामने आ रही है. यहां एक व्यक्ति ने बकरों की एक जोड़ी को 4.5 लाख रुपये देकर खरीदा है. मंगलवार को लखनऊ में गोमती नदी के पास वाले बाजार में बकरों का यह महंगा जोड़ा एक युवक ने ईद-उल-जुहा के मौके पर कुर्बानी देने के लिए खरीदा है.

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इन बकरों में क्या खास है

युवक ने जिन बकरों को खरीदा है उनमें से एक बकरे का वजन 170 किलो है वहीं दूसरे का वजन 150 किलो है. दोनों दो साल के हैं. अगर उनके रोजाना के आहार के बारे में बात करें तो वह लगभग 600 रुपये का पड़ता है. उनके आहार में काजू, पिस्ता, बादाम, मिठाई और महंगे जूस शामिल हैं. दोनों बकरे मौसमी व अनार का जूस पीते हैं. जो उन्हें अच्छा दिखने और तंदरुस्त रहने में मदद करते हैं. इसके साथ ही सफाई का भी खास ध्यान रखते हुए इन्हे रोज़ाना स्नान करवाया जाता है. 

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क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी 

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार  ईद-उल-अजहा पर हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी दी थी. अल्लाह के प्रति श्रद्धा दिखाते हुए इस मौके पर अपनी सबसे प्यारी चीजों की कुर्बानी दी जाती है. इसी वजह से ईद से कुछ दिन पहले से ही लोग अपने घर बकरा, भेड़ आदि लेकर आते हैं और  ईद-उल-अजहा के मौके पर उसकी कुर्बानी देते हैं. 

ईद के मौके पर कोरोना प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां 

इस बीच, लखनऊ के कुड़िया घाट में बकरा बाजार में ईद उल-अज़हा के मौके पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली. भीड़ के साथ ही ज्यादातर लोग कोरोना प्रोटोकॉल को नजरअंदाज करते दिखे. इंडिया टुडे से बात करते हुए, 23 वर्षीय दुकानदार अहमद ने कहा कि बाजार में बहुत कम लोग मास्क पहन रहे हैं क्योंकि कोरोना के मामलों में काफी कमी आई है.अहमद ने आगे कहा कि वह 25 किलोमीटर दूर से बाजार में सामान बेचने आया था लेकिन इस साल कारोबार मंदा रहा है. 

ईद उल-अज़हा को लूनर कैलेंडर के 12वें महीने धू अल-हिज्जा के 10वें दिन और रमजान के महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है. 

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