नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) बिजली उत्पादक कंपनियों का वितरण कंपनियों पर कुल बकाया मार्च 2021 में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3.4 प्रतिशत घटकर 78,379 करोड़ रुपये रहा। यह बताता है कि वितरण कंपनियों के ऊपर बकाये मामले में स्थिति अब सुधर रही है।

बिजली उत्पादकों का वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर बकाया पिछले कई साल से लगातार बढ़ता रहा था। यह स्थिति इस साल फरवरी तक थी। यह बिजली क्षेत्र में दबाव की स्थिति के बयां करता है।

प्राप्ति पोर्टल (भुगतान पुष्टि और उत्पादकों के चालान-प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने हेतु बिजली खरीद विश्लेषण) के अनुसार वितरण कंपनियों पर बिजली उत्पादकों का बकाया मार्च 2020 में 81,116 करोड़ रुपये था।

इससे पहले, इस साल फरवरी और जनवरी में बकाया क्रमश: 98,673 करोड़ रुपये और 99,023 करोड़ रुपये था।

प्राप्ति पोर्टल बिजली उत्पादकों और वितरण कंपनियों के बीच बिजली खरीद सौदों में पारदर्शिता लाने हेतु मई 2018 में पेश किया गया।

पोर्टल के अनुसार मार्च 2021 में डिस्कॉम पर पिछला बकाया 67,417 करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले इसी अवधि में 68,517 करोड़ रुपये था। पिछला बकाया से आशय उस राशि से है जिसका भुगतान 45 दिन की मोहलत अवधि के बाद भी नहीं किया गया।

पिछला बकाया इस फरवरी में 84,478 करोड़ रुपये और जनवरी में 85,490 करोड़ रुपये था।

बिजली उत्पादक, वितरण कंपनियों को बिजली आपूर्ति के भुगतान के लिये 45 दिन का समय देते हैं। उसके बाद बकाया राशि पिछला बकाया बन जाती है और उत्पादक कंपनियां ज्यादातर मामलों में ब्याज जोड़ती हैं।

आंकड़े के अनुसार राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और तमिलनाडु में वितरण कंपनियों पर उत्पादक कंपनियों का सर्वाधिक बकाया है।

कुल 67,417 करोड़ रुपये के पिछले बकाये में स्वतंत्र बिजली उत्पादकों की हिस्सेदारी 52.5 प्रतिशत जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली उत्पादकों की 30.82 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर