कोरोना महामारी के दौर में लोग कमाई को लेकर परेशान हैं. लॉकडाउन की वजह से लोगों के आय के साधनों में कमी आई है. इस बीच कोरोना वायरस महामारी के दौरान पिछले एक साल में हरियाणा सरकार ने लगभग 20 विभागों में कार्यरत 6,000 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की है, जिनमें संविदा और आउटसोर्स किए गए कर्मचारी भी शामिल हैं. राज्य के एक कर्मचारी संघ ने यह दावा किया हैं.

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पीटीआई के मुताबिक, हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने यहां एक बयान में आरोप लगाया, 'एक तरफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने निजी फैक्ट्री मालिकों से अपील की है कि कोरोना काल में किसी भी मजदूर को नौकरी से न निकालें और दूसरी तरफ सरकार खुद अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है.'

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उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल से हरियाणा सरकार ने राज्य सरकार के लगभग 20 विभिन्न विभागों के संविदा और आउटसोर्स सहित 6,408 कर्मचारियों की छंटनी की है.

उन्होंने दावा किया, 'छंटनी में सबसे अधिक प्रभावित आउटसोर्सिंग पर कम वेतन पाने वाले तीसरे और चौथे स्तर के कर्मचारी हुए हैं.'

लांबा ने मांग की है कि खट्टर को छंटनी किए गए कर्मचारियों को तत्काल वापस लेना चाहिए.

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उन्होंने कहा, 'ये कर्मचारी हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से कई विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सत्ता के नशे में धुत्त भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया.'

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