विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्रिटेन के उनके समकक्ष डोमिनिक राब ने अफगानिस्तान में घटनाक्रम पर विचार साझा किए और साझा सुरक्षा खतरों से निपटने, शरणार्थियों का सहयोग करने और आम अफगान नागरिकों की मानवीय दुर्दशा को खत्म करने के लिए एक साथ मिलकर काम करने पर सहमति जतायी. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की अध्यक्षता के तहत प्रौद्योगिकी, शांति रक्षा और आतंकवाद विरोध पर परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करने के लिए सोमवार को न्यूयॉर्क पहुंचे.

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उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और अन्य विदेश मंत्रियों से अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा और द्विपक्षीय बैठकें की.

जयशंकर ने बुधवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद ट्वीट किया, ‘‘ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब के साथ आज बातचीत का स्वागत करता हूं. अफगानिस्तान के घटनाक्रम और आसन्न चुनौतियों पर विचार साझा किए.’’

राब ने कहा कि उन्होंने अफगानिस्तान में स्थिति को लेकर जयशंकर से बात की. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ब्रिटेन और भारत साझा सुरक्षा खतरों, शरणार्थियों को सहयोग देने और आम अफगान नागरिकों की मानवीय दुदर्शा खत्म करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे.’’

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बुधवार को शांति रक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने पत्रकारों से कहा कि अफगानिस्तान में घटनाक्रम पर भारत करीबी नजर रख रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘अभी हर किसी की तरह हम अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर बहुत सावधानीपूर्वक नजर रख रहे हैं. मुझे लगता है कि हमारा ध्यान अफगानिस्तान में सुरक्षा और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने पर है.’’

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भारत ने कहा कि अफगानिस्तान से आने और वहां जाने के लिए मुख्य चुनौती काबुल हवाईअड्डे का संचालन है.

जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ भी अफगानिस्तान में ‘‘ताजा घटनाक्रम’’ पर चर्चा की और ‘‘काबुल में हवाईअड्डों का संचालन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया.’’

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